Bihar Budget Session: बिहार विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान राज्य के सरकारी दफ्तरों में निजी गाड़ियों के इस्तेमाल और इससे बिहार सरकार को हो रहे राजस्व के नुकसान का मामला विपक्ष ने उठाया। विपक्ष के इस सवाल पर सरकार की तरफ से मंत्री जवाब को घूमा दिया और गोलमोल जवाब देकर बच निकले।
दरअसल, विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान आरजेडी एमएलसी सौरभ कुमार ने सरकारी दफ्तरों में निजी गाड़ियों के इस्तेमाल और इससे बिहार सरकार को हो रहे राजस्व के नुकसान का मामला सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि अक्सर यह देखा गया है कि जो भी सरकार के अधिकारी होते हैं, जो व्यवसायिक गाड़ियों का उपयोग नही कर निजी गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं जो सीधा राजस्व की क्षति है।
उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से मेरे इस सवाल को अस्वीकृत कर दिया गया है लेकिन विभागीय मंत्री से सवाल है कि वे पत्र जारी कर पूछे कि सरकारी कार्यालयों में कितनी गाड़ी किराए पर चल रही हैं। उसमें व्यवसायिक वाहन कितने हैं और निजी वाहन कितने हैं। निजी गाड़ियों पर बिहार सरकार का बोर्ड लगा होने के कारण सरकारी अधिकारी टोल टेक्स नहीं देते हैं। क्या अधिकारी ट्रेन पर बैठेंगे तो उसपर भी बिहार सरकार का बोर्ड लगा देंगे?
इसपर परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने सदन में जवाब दिया और कहा कि परिवहन विभाग की तरफ से निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसे वाहन जिनका निजी नंबर है, उन्हें व्यवसायिक कार्य में नहीं लगाना है। हमने जांच के आदेश दिए हैं और पूछा है कि ऐसे कितने वाहन हैं, उनको राज्यभर में चिन्हित किया जाए।
उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि अगर गाड़ी का प्राइवेट नंबर है और ऐसे वाहन सरकारी काम में लगे हैं तो ऐसे वाहन मालिकों पर जुर्माना लगाया जाएगा हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि जो अधिकारी अपने निजी वाहन पर बिहार सरकार का बोर्ड लगाकर घूमते हैं और टोल टेक्स भी नहीं भरते उनके खिलाफ क्या एक्शन लिया जाएगा?




