Udit Narayan: बॉलीवुड सिंगर उदित नारायण पिछले कुछ दिलों से सुर्खियां बटोर रहे हैं। हाल के दिनों में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था, जिसमें वह स्टेज शो के दौरान महिलाओं को सरेआम किस करते नजर आए थे। इस मामले में भारी फजीहत होने के बाद अब एक दूसरे मामले में उदित नारायण के खिलाफ राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
दरअसल, उदित नारायण पर आरोप है कि उन्होंने पहली पत्नी के रहते हुए दूसरी महिला से शादी रचाई, जो भारतीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। 21 फरवरी के इस मामले में उदित नारायण सुपौल की कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए थे और अपना पक्ष रखा था। अब उदित नारायण के खिलाफ बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में अलग-अलग याचिका दाखिल की गई है। इन याचिकाओं में पहली पत्नी को अधिकार देने की मांग की हई है।
सिंगर उदित नारायण की पहली पत्नी की तरफ से उनके वकील एसके झा ने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है। सिंगर उदित नारायण के विरुद्ध बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष दो अलग-अलग याचिका दाखिल की गई है। 'पहला नशा' और 'पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा' जैसे सुपरहिट गानों को आवाज़ दे चुके उदित नारायण झा की पहली शादी बिहार में रंजना झा से हुई थी। उन दिनों उनका इतना बड़ा क्रेज नहीं था।
जब वह बिहार छोड़कर मुंबई चले गये तो वहां नेपाल की सिंगर दीपा गहतराज से उन्हें प्यार हो गया और उन्होंने शादी रचा ली। उदित नारायण की पहली शादी वर्ष 1984 में रंजना झा से हुई थी। उदित नारायण की पहली पत्नी रंजना नारायण झा अपने पति के साथ रहना चाहती हैं तथा उम्र व स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए रंजना झा का पति के साथ रहना जरुरी भी है। रंजना झा पत्नी का दर्जा प्राप्त करने एवं अपने अधिकारों के लिए वर्षों से संघर्ष कर रही है। ऐसे में इस मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है।
मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस. के. झा अब इस पूरे मामले को लेकर मानवाधिकार आयोग पहुंच गये हैं। उन्होंने एनएचआरसी व बीएचआरसी में दो अलग-अलग याचिका दाखिल किए हैं। मानवाधिकार अधिवक्ता एस. के. झा ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुसार दूसरी शादी, पहली पत्नी को बिना तलाक दिए करना गैरकानूनी है तथा हिन्दू विवाह अधिनियम के अनुसार ऐसी स्थिति में उनकी दूसरी शादी को शून्य शादी और गैरकानूनी माना जाना चाहिए, कारण कि जब कानून है तो यह कानून सब पर समान रूप से लागु होना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि उदित नारायण जैसे सेलिब्रिटी के द्वारा इस प्रकार का कदम उठाया जाना महिलाओं के अधिकारों पर कुठाराघात है, जो मानवाधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने आगे कहा है कि उदित नारायण के द्वारा अपनी पहली पत्नी को उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास किया जाना, इस बात का परिचायक है कि उदित नारायण अपनी पहली पत्नी के मानवाधिकार के प्रति सजग नहीं हैं। फिलहाल यह मामला मानवाधिकार आयोग के समक्ष पहुंच गया है और उदित नारायण की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही है।





