ब्रेकिंग
UCC पर डॉ प्रेम कुमार का बड़ा बयान, बोले- ‘एक देश, एक कानून’ पूरे भारत में लागू होमंत्री अशोक चौधरी बने असिस्टेंट प्रोफेसर, पटना के एएन कॉलेज में ली पहली क्लासनीतीश कुमार पर प्रशांत किशोर ने बोला बड़ा हमला, कहा..अब JDU भी परिवारवाद से अछूता नहीं रहा हाजीपुर में निगरानी की बड़ी कार्रवाई, 50 हजार घूस लेते खनन विभाग के दो कर्मचारी रंगेहाथ गिरफ्तारपटना में रामनवमी पर हाई अलर्ट, महावीर मंदिर समेत प्रमुख स्थलों पर कड़ी सुरक्षा के प्रबंधUCC पर डॉ प्रेम कुमार का बड़ा बयान, बोले- ‘एक देश, एक कानून’ पूरे भारत में लागू होमंत्री अशोक चौधरी बने असिस्टेंट प्रोफेसर, पटना के एएन कॉलेज में ली पहली क्लासनीतीश कुमार पर प्रशांत किशोर ने बोला बड़ा हमला, कहा..अब JDU भी परिवारवाद से अछूता नहीं रहा हाजीपुर में निगरानी की बड़ी कार्रवाई, 50 हजार घूस लेते खनन विभाग के दो कर्मचारी रंगेहाथ गिरफ्तारपटना में रामनवमी पर हाई अलर्ट, महावीर मंदिर समेत प्रमुख स्थलों पर कड़ी सुरक्षा के प्रबंध

Jharkhand News: झारखंड में 75 में से एक बच्चा ऑटिज्म से प्रभावित, समय पर इलाज है आवश्यक

Jharkhand News: ऑटिज्म एक जटिल न्यूरोडेवलपमेंटल विकार है जो बच्चों के मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक विकास को प्रभावित करता है। हाल के वर्षों में, झारखंड सहित पूरे भारत में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

ऑटिज्म, Autism, मानसिक विकास, Mental Development, बौद्धिक विकास, Intellectual Development, एकल परिवार, Nuclear Family, संयुक्त परिवार, Joint Family, स्क्रीन टाइम, Screen Time, मोबाइल उपयोग, Mobile Usa
प्रतीकात्मक तस्वीर
© Google
Nitish KumarNitish Kumar|
|AMP
विज्ञापन — Rectangle

Jharkhand News: समाज में एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति ने कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दिया है, जिनमें से एक ऑटिज्म भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त परिवारों में बच्चों का अधिक सामाजिक संपर्क और भावनात्मक लगाव होने से उनका मानसिक और बौद्धिक विकास बेहतर होता था। लेकिन, एकल परिवारों में यह कमी देखने को मिल रही है, जिससे ऑटिज्म के मामले बढ़ रहे हैं। झारखंड में हर 75 में से एक बच्चा इस विकार से प्रभावित है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 68 में से एक है।


झारखंड में ऑटिज्म की स्थिति और इसके बढ़ने के कारण

ऑटिज्म कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन पहले इसको लेकर जागरूकता की कमी थी। 19वीं सदी में इस पर शोध शुरू हुए और धीरे-धीरे मेडिकल साइंस ने इसके कारणों और प्रभावों को समझा। झारखंड में भी यह समस्या बढ़ रही है, जिसमें पारिवारिक संरचना में बदलाव एक अहम कारक है। संयुक्त परिवारों में बच्चों का संपर्क कई लोगों से होता था, जिससे उनका सामाजिक और मानसिक विकास बेहतर होता था। वर्तमान में, रांची के एक सेंटर में 40 ऑटिज्म प्रभावित बच्चों का इलाज चल रहा है, जिससे इसकी गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।


मोबाइल और स्क्रीन टाइम का प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल और स्क्रीन टाइम का अत्यधिक उपयोग ऑटिज्म बढ़ाने वाला प्रमुख कारण बन गया है। व्यस्तता के चलते माता-पिता छोटे बच्चों को मोबाइल देने लगे हैं, जिससे उनकी मानसिक सेहत प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से ढाई साल तक के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए, क्योंकि यह उनके सामाजिक और भावनात्मक विकास को बाधित करता है। लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों की संवाद क्षमता प्रभावित होती है और वे दूसरों से मेलजोल में रुचि नहीं लेते, जिससे ऑटिज्म के लक्षण उभर सकते हैं।


ऑटिज्म की पहचान और इलाज

अगर कोई बच्चा उम्र के अनुसार मानसिक और बौद्धिक विकास नहीं कर रहा है, पलटना, चलना या बोलना सीखने में देरी हो रही है, या समझने की क्षमता कमजोर है, तो अभिभावकों को सतर्क हो जाना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। ऑटिज्म के इलाज में एक समर्पित मेडिकल टीम काम करती है, जिसमें शिशु रोग विशेषज्ञ, ईएनटी, हड्डी रोग विशेषज्ञ और शिशु न्यूरोलॉजिस्ट शामिल होते हैं। जल्दी इलाज शुरू करने से समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिलती है और बच्चे का विकास बेहतर हो सकता है।

टैग्स
इस खबर के बारे में
Nitish Kumar

रिपोर्टर / लेखक

Nitish Kumar

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

विज्ञापन

संबंधित खबरें