Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने उनके खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश को चुनौती दी थी। यह सिफारिश सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा की गई थी।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा का आचरण विश्वास पैदा करने योग्य नहीं है, इसलिए उनकी याचिका पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। जस्टिस वर्मा ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि इन-हाउस जांच प्रक्रिया असंवैधानिक है और यह संसद के विशेषाधिकार को कमजोर करती है, क्योंकि जजों को हटाने का अधिकार केवल संसद को है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच समिति ने उन्हें उचित सुनवाई का अवसर नहीं दिया और साक्ष्यों की अनदेखी की हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन-हाउस प्रक्रिया को पूर्ववर्ती निर्णयों में वैध ठहराया जा चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने समिति की रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजकर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की सीजेआई सिर्फ एक डाकघर नहीं होता। यदि किसी न्यायाधीश के खिलाफ कदाचार के प्रमाण हैं, तो सीजेआई का कर्तव्य है कि वह उन्हें सरकार तक पहुंचाएं।




