भारतीय सेना केवल एक सैन्य बल नहीं, बल्कि परंपरा, बलिदान और पीढ़ियों से चली आ रही राष्ट्रसेवा की भावना का प्रतीक है। देश की सीमाओं की रक्षा से लेकर हर संकट की घड़ी में नागरिकों की सहायता तक, भारतीय सेना ने हमेशा अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा है।
सेना में सेवा करना कई परिवारों के लिए सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि एक गौरवशाली विरासत बन चुका है, जहाँ एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक देशभक्ति और अनुशासन के संस्कार आगे बढ़ते रहे हैं। ऐसी ही गौरवशाली सैन्य परंपराओं के उदाहरण भारत में आज भी देखने को मिलते हैं, जहाँ एक ही परिवार की कई पीढ़ियाँ लगातार भारतीय सेना में अपनी सेवाएँ दे रही हैं।
इस परिवार की पाँचवीं पीढ़ी में जन्मे लेफ्टिनेंट सरताज सिंह को 20 जाट रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त हुआ है। उनके पूर्वज वर्ष 1897 से ही सेना में सेवा करते आ रहे हैं। उनके पिता ब्रिगेडियर उपिंदर पाल सिंह भी जाट रेजिमेंट में अधिकारी रह चुके हैं। वहीं, उनके दादा ब्रिगेडियर हरवंत सिंह ने 1965 और 1971 के भारत–पाकिस्तान युद्धों में भाग लिया था। इसके अलावा उनके चाचा कर्नल हरविंदर पाल सिंह भी 1999 के कारगिल युद्ध में शामिल रहे हैं।
लेफ्टिनेंट सरताज सिंह के पिता की ओर ही नहीं, बल्कि ननिहाल पक्ष में भी कई लोग सेना में अधिकारी रह चुके हैं। इनमें कैप्टन हरभगत सिंह, कैप्टन गुरमेल सिंह, कर्नल गुरसेवक सिंह और कर्नल इंदरजीत सिंह के नाम शामिल हैं। प्रथम विश्व युद्ध हो या द्वितीय विश्व युद्ध, उनके परिवार का कोई न कोई सदस्य इनमें अवश्य शामिल रहा है। वहीं 1971 की लड़ाई में भी लेफ्टिनेंट के परिवार के सदस्य शामिल थे।
पंजाब में ऐसा केवल एक ही परिवार नहीं है, बल्कि कई अन्य परिवार भी हैं जो पीढ़ियों से भारतीय सेना की सेवा करते आ रहे हैं। आईएमए से मिली जानकारी के अनुसार, लेफ्टिनेंट हरमनप्रीत सिंह रीन का परिवार भी भारतीय सेना में सेवा करता रहा है। उनके दादा सहित दो भाइयों ने 1965 के भारत–पाकिस्तान युद्ध में भाग लिया था, जिनमें से कैप्टन उजागरे सिंह को पदक भी मिला था। हरमनप्रीत सिंह के पिता हरमीत सिंह मराठा लाइट इन्फैंट्री में कार्यरत हैं।





