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Maha Kumbh Stampede Case: महाकुंभ भगदड़ मामले में योगी सरकार को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने की अहम सुनवाई

Maha Kumbh Stampede Case: महाकुंभ में मौनी अमावस्या के दिन हुई भगदड़ के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है.

Maha Kumbh Stampede Case
यूपी सरकार को बड़ी राहत
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Mukesh Srivastava
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Maha Kumbh Stampede Case: बीते 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज के महाकुंभ मेले में हुई भगदड़ मामले में यूपी की योगी सरकार को बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाई कोर्ट में इस मामले पर अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद भगदड़ को लेकर दाखिल याचिका को खारिज कर दिया।


दरअसल, बीते 29 जनवरी को प्रयागराज में मौनी अमावस्या के मौके पर महाकुंभ में स्नान करने के लिए संगम घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी। इसी दौरान भदगड़ मच गई और इस भगदड़ में 30 लोगों की जान चली गई जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए थे। घटना की जांच के लिए योगी सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन किया था। सरकार ने आयोग से एक माह के भीतर रिपोर्ट मांगी लेकिन बाद में समय सीमा को बढ़ा दिया।


इसी बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट के बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव सुरेंद्र चंद्र पांडेय ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की। इस याचिका में भगदड़ के दौरान लापता हुए लोगों का पता लगाने, पीड़ितों की सही गिनती किए जाने और निगरानी समिति गठित करने समेत अन्य मांगे की गई थीं। सोमवार को हाई कोर्ट में इस जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।


यूपी सरकार ने कोर्ट को बताया कि न्यायिक आयोग की जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। जांच में ऐसे बिंदुओं को भी शामिल किया गया है, जिसकी मांग जनहित याचिका में की गई थी। आयोग को जांच के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय भी दिया गया है। चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया।


कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी बातों को न्यायिक आय़ोग के समक्ष रख सकते हैं। अगर वह न्यायिक आयोग की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होते हैं तो फिर से कोर्ट आ सकते हैं। इसके साथ ही अदालत ने इस जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया।

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Mukesh Srivastava

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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