BIHAR ELECTION : बिहार में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इसी कड़ी में चुनाव आयोग की उच्चस्तरीय टीम 4 और 5 अक्टूबर को राज्य का दौरा करेगी। इस दौरे में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दोनों निर्वाचन आयुक्त भी शामिल रहेंगे। दौरे का मकसद बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेना और प्रशासनिक स्तर पर सभी व्यवस्थाओं को परखना है।
चुनाव आयोग की टीम अपने इस दो दिवसीय दौरे के दौरान राज्य के शीर्ष अधिकारियों और जिला प्रशासन के साथ अलग-अलग बैठक करेगी। इसमें मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), केंद्रीय एजेंसियों के राज्य प्रमुख तथा सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी शामिल होंगे। इस दौरान आयोग की प्राथमिकता राज्य में निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव कराने की रहेगी। बैठक में सुरक्षा बलों की तैनाती, संवेदनशील इलाकों की पहचान, आचार संहिता के पालन और आदर्श मतदान माहौल सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
इसके पहले 3 अक्टूबर को नई दिल्ली के द्वारिका स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट में बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़े ऑब्जर्वरों के साथ अहम बैठक होगी। इस बैठक में आयोग ऑब्जर्वरों को विशेष दिशा-निर्देश देगा और बिहार चुनाव के मद्देनजर उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करेगा।
बिहार में चुनाव आयोग का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। आयोग की टीम राज्य में विभिन्न पक्षों से संवाद करेगी। इसमें राज्य निर्वाचन आयुक्त के साथ बैठक के अलावा राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात होगी। आयोग दलों से सुझाव और सलाह लेगा ताकि चुनाव प्रक्रिया को और अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाया जा सके।
राजनीतिक दलों को इस बैठक से बड़ी उम्मीदें हैं। सत्तारूढ़ दल जहां चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए सुरक्षा इंतजामों पर जोर दे सकता है, वहीं विपक्षी दल निष्पक्षता और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका को लेकर अपनी चिंताएं सामने रख सकते हैं। आयोग इन सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगा और आवश्यक निर्देश जारी करेगा।
चुनाव आयोग की टीम बिहार का दौरा करने के बाद दिल्ली लौटेगी और फिर किसी भी दिन विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। आमतौर पर आयोग राज्यों की तैयारियों की समीक्षा के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित करता है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा हो जाएगी।
बिहार में राजनीतिक गतिविधियां पहले से ही तेज हो चुकी हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। सभी दल अपने उम्मीदवारों के चयन, संगठन की मजबूती और प्रचार अभियान की रूपरेखा तैयार करने में जुटे हुए हैं। आयोग की ओर से तारीखों की घोषणा होते ही प्रदेश में आचार संहिता लागू हो जाएगी और राजनीतिक पारा और भी चढ़ जाएगा।
बहरहाल, 4-5 अक्टूबर को होने वाला चुनाव आयोग का बिहार दौरा आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा और रूपरेखा तय करने वाला साबित होगा। इस दौरे के बाद ही यह साफ हो जाएगा कि राज्य कब चुनावी मोड में प्रवेश करेगा और मतदाताओं को लोकतंत्र के इस महापर्व में भाग लेने का अवसर कब मिलेगा।






