Bihar elections 2025: ग्राम चुनाव पर आधारित चर्चित वेबसीरीज ‘पंचायत’ में बनराकस के किरदार से दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाले दरभंगा के अभिनेता दुर्गेश कुमार ने बिहार चुनाव को लेकर अहम बयान दिया है। वेबसीरीज में उनका किरदार अंततः प्रधान का चुनाव जीत जाता है, लेकिन वास्तविक जीवन में दुर्गेश का अनुभव काफी अलग रहा है। एक इंटरव्यू में दुर्गेश ने बताया कि उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र अलीनगर में हमेशा सही उम्मीदवार को वोट दिया है, लेकिन उनका वोट कभी विजयी नहीं रहा।
अलीनगर बिहार की वही सीट है, जहां इस बार बीजेपी ने चर्चित लोक गायिका मैथिली ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है। दुर्गेश कुमार ने खुलासा किया कि यहां चुनावी टिकट लगभग दो करोड़ रुपये में बिकता है। उन्होंने कहा, “अलीनगर का मेरे पास वोटर आईडी कार्ड है। मैं हर बार सही उम्मीदवार को वोट देता हूं, लेकिन वह कभी जीतता नहीं है। वहां कौन जीतता है, यह आपको पता है। दो करोड़ रुपये में टिकट बिकता है।” दुर्गेश के इस बयान से बिहार के चुनावी माहौल और टिकट वितरण में पैसों की भूमिका पर नई बहस छिड़ गई है।
दुर्गेश कुमार बिहार की मिट्टी से निकलने वाले उन कलाकारों में से हैं जिन्होंने बिना किसी गॉडफादर के अपने अभिनय के दम पर दर्शकों का दिल जीता है। उनका जन्म और पालन-पोषण दरभंगा में हुआ, और उन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत रंगमंच और कॉलेज के ड्रामा प्रतियोगिताओं से की। गांव के नुक्कड़ नाटक और थिएटर में काम करते हुए उन्होंने अभिनय की बारीकियों को समझा और इसे अपनी पहचान बनाया।
उनका मानना है कि अभिनय केवल संवाद बोलने की कला नहीं, बल्कि जीवन को समझने और जीने की कला है। पंचायत वेबसीरीज में बनराकस के किरदार ने हास्य और ग्रामीण जीवन की सच्चाई की जो परतें दर्शाईं, उन्हें दर्शकों के दिलों में अमर कर दिया। दुर्गेश ने कहा कि जब उन्हें इस किरदार के लिए चुना गया, तो उन्होंने गांव की बोलचाल, देहाती हावभाव और ग्रामीण जीवन की वास्तविकता को करीब से महसूस किया। यही वजह है कि ‘पंचायत’ का हर दृश्य इतना जीवंत और प्रभावशाली लगता है।
इसके अलावा दुर्गेश ने यह भी कहा कि बिहार के चुनावी अनुभव ने उन्हें राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों की गहराई समझने में मदद की। उनके मुताबिक, राजनीति सिर्फ सत्ता का खेल नहीं बल्कि समाज की उम्मीदों, पैसों और समीकरणों का जटिल मिश्रण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कलाकारों और आम नागरिकों को भी लोकतंत्र और मतदान प्रक्रिया में सजग रहना चाहिए।
दुर्गेश कुमार की यह खुली बातचीत और उनके चुनावी अनुभव ने बिहार की राजनीति में टिकट वितरण और पैसों की भूमिका पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही, उनके बनराकस जैसे किरदार ने यह भी दिखाया कि सिनेमाई कला और वास्तविक जीवन अनुभव आपस में गहराई से जुड़े हैं।





