Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण का मतदान मंगलवार सुबह 7 बजे से शांतिपूर्ण माहौल में शुरू हो गया है। इस चरण में 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर वोटिंग जारी है। चुनाव आयोग की सख्त निगरानी में सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच मतदाता अपने-अपने बूथों पर पहुंचकर लोकतंत्र के इस पर्व में हिस्सा ले रहे हैं।
इस बार के दूसरे चरण की सबसे खास बात यह है कि इनमें से 47 सीटें ऐसी हैं, जहां लगातार दो बार कोई भी राजनीतिक दल जीत हासिल नहीं कर सका है। वर्ष 2010, 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव के नतीजे इस बात की पुष्टि करते हैं कि इन सीटों पर जनता हर बार सत्ता बदलने का मिजाज रखती रही है। यही कारण है कि 2025 का चुनाव इन सीटों पर बेहद दिलचस्प और निर्णायक माना जा रहा है।
हर बार बदला है जनादेश
राज्य में वर्ष 2010 में नए परिसीमन के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव हुए थे। कई पुराने क्षेत्रों का अस्तित्व समाप्त हुआ, तो कई नई सीटें अस्तित्व में आईं। तब से लेकर अब तक इन 47 सीटों पर एक खास ट्रेंड देखने को मिला—किसी भी पार्टी को लगातार दो बार जनादेश नहीं मिला। जनता हर बार नई पार्टी को मौका देती रही है।
2010 में जहां एनडीए के पक्ष में माहौल था, वहीं 2015 में महागठबंधन को बड़ी बढ़त मिली। इसके बाद 2020 में फिर से एनडीए का पलड़ा भारी रहा। लेकिन इन 47 सीटों पर बार-बार बदलाव का यह सिलसिला जारी रहा। अब देखना यह होगा कि 2025 में कौन सी पार्टी इस परंपरा को तोड़ पाती है।
2020 में भाजपा को मिली थी सबसे अधिक सीटें
पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में इन 47 सीटों में से सबसे अधिक 20 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद जदयू को 8, राजद को 5, एआईएमआईएम को 4, भाकपा माले को 3, कांग्रेस को 2, हम और वीआईपी को 2-2 सीटें मिली थीं। वहीं, एक सीट चकाई से निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी।
भाजपा की जिन सीटों पर जीत हुई थी, उनमें नरकटियागंज, बेतिया, हरसिद्धि, गोविंदगंज, ढाका, बरौली, पातेपुर, रीगा, सीतामढ़ी, बेनीपट्टी, खजौली, झंझारपुर, बिहपुर, कोढ़ा, नरपतगंज, सहरसा, पिरपैंती, कटोरिया, जमुई और वजीरगंज शामिल हैं। जदयू ने वाल्मीकिनगर, केसरिया, सुरसंड, हरलाखी, बहादुरपुर, पिपरा, बरारी और झाझा जैसी सीटों पर जीत हासिल की थी। राजद को कल्याणपुर, गोविंदपुर, गोह, भभुआ और मोहनियां से सफलता मिली थी।
कांग्रेस को राजापाकड़ और चेनारी सीटों पर जीत मिली थी, जबकि माले ने सिकटा, अरवल और काराकाट पर कब्जा जमाया था। एआईएमआईएम ने अमौर, बायसी, ठाकुरगंज और कोचाधामन सीटों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी। वहीं, हम ने सिकंदरा और बाराचट्टी सीट जीती थी।
इस बार चुनौती और उत्सुकता दोनों ज्यादा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन 47 सीटों पर 2025 में बेहद कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। भाजपा और जदयू जहां फिर से अपनी पुरानी सीटों पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं, वहीं राजद और कांग्रेस इन्हें अपने कब्जे में लेने के लिए जोर-शोर से प्रचार कर रही हैं।
राजनीतिक दलों ने इस बार स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ रोजगार, शिक्षा, बिजली, सड़क और महंगाई जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया है। युवा मतदाता वर्ग इस बार का निर्णायक फैक्टर माना जा रहा है। वहीं, महिला वोटरों की भागीदारी भी पहले से अधिक देखने को मिल रही है।
14 नवंबर को खुलेगा जनता के फैसले का पिटारा
दूसरे चरण की वोटिंग के बाद अब सबकी निगाहें 14 नवंबर पर टिकी हैं, जब मतगणना होगी और यह तय होगा कि क्या इस बार कोई पार्टी लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर परंपरा तोड़ पाएगी या फिर जनता एक बार फिर बदलाव का फैसला सुनाएगी।
बिहार की राजनीति में यह 47 सीटें “सियासी बैरोमीटर” मानी जा रही हैं, क्योंकि यहां का रुझान पूरे राज्य की दिशा तय कर सकता है। ऐसे में दूसरे चरण का यह मतदान न केवल प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेगा बल्कि आने वाले दिनों में बिहार की सत्ता की तस्वीर भी साफ करेगा।






