बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उम्मीदवारों के हलफनामे चर्चा में हैं। इन हलफनामों ने यह साफ कर दिया है कि बिहार के "जनसेवक" अब करोड़ों की संपत्ति के मालिक बन चुके हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में कई ऐसे मंत्री हैं जिनकी संपत्ति करोड़ों में पहुंच चुकी है। किसी के पास जमीन-जायदाद की भरमार है, तो किसी की पत्नी उनसे भी ज्यादा संपन्न निकली हैं। आइए जानते हैं नीतीश सरकार के उन 5 मंत्रियों की संपत्ति का पूरा ब्यौरा, जिन्होंने अपने हलफनामे से सबको चौंका दिया है।
1. विजय कुमार चौधरी – पत्नी गंगा चौधरी से कम संपत्ति
बिहार सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले और सरायरंजन विधानसभा से नामांकन करने वाले मंत्री विजय कुमार चौधरी की कुल संपत्ति लगभग 1.09 करोड़ रुपये है, जबकि उनकी पत्नी गंगा चौधरी के पास 43 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति है। 68 वर्षीय मंत्री के पास मात्र 75 हजार रुपये नकद, 15 लाख बैंक बैलेंस, और 60 हजार रुपये की मारुति अल्टो है। वहीं, उनकी पत्नी के पास 2.5 लाख रुपये नकद, 12.5 लाख रुपये बैंक में, और 240 ग्राम सोना यानी लगभग 27 लाख रुपये के गहने हैं। विजय चौधरी ने 77 लाख रुपये से अधिक का निवेश किया है, जबकि उनकी पत्नी ने भी UTI, ICICI और बिरला पॉलिसी में लाखों रुपये निवेश किए हैं। इसके अलावा, पटना और उनके गांव में करोड़ों की जमीन और फ्लैट भी दर्ज हैं।
2. जीवेश कुमार मिश्रा – 10 करोड़ की संपत्ति वाले मंत्री
नगर विकास एवं आवास मंत्री जीवेश मिश्रा, जो जाले विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं, उनके पास 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। हलफनामे के अनुसार, उनके पास 3 हजार रुपये नकद, 66 लाख बैंक बैलेंस, और 3 करोड़ की जमीन है। इसके अलावा उनके पास 15 लाख रुपये का वाहन और 10 लाख का सोना है।
उनकी पत्नी के पास 2 करोड़ रुपये बैंक में, 38 लाख रुपये का वाहन, और 11 लाख का सोना है। मिश्रा दंपति के नाम पर दरभंगा और आसपास के इलाकों में 6 करोड़ रुपये की जमीन दर्ज है। हालांकि, इनके ऊपर 1 करोड़ रुपये का बैंक लोन भी है। बताया जा रहा है कि 2020 के मुकाबले इनकी संपत्ति कई गुना बढ़ी है।
3. संजय सरावगी – सबसे अमीर मंत्री
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी को बिहार के सबसे अमीर मंत्रियों में गिना जा रहा है। उनके पास 10 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति है।हलफनामे के मुताबिक, सरावगी के पास 59 लाख रुपये नकद, 28 लाख बैंक में, और 60 लाख रुपये पोस्ट ऑफिस में निवेश के रूप में हैं। उनकी पत्नी के पास 72 लाख रुपये शेयर में, 11 लाख पोस्ट ऑफिस में, और 43 लाख रुपये का सोना है।
सरावगी परिवार के पास कई लग्जरी गाड़ियां, 1 लाख रुपये का कंप्यूटर, और 40 लाख रुपये तक के हथियार भी दर्ज हैं। हालांकि, उनके खिलाफ तीन आपराधिक मामले और 76 लाख रुपये की देनदारी भी दर्ज है।
4. मदन सहनी – पांच साल में तीन गुना बढ़ी संपत्ति
समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी की संपत्ति भी करोड़ों में पहुंच चुकी है। उनके पास कुल 3 करोड़ रुपये की संपत्ति है। हलफनामे में उन्होंने बताया कि उनके पास 80 हजार रुपये नकद, 9 लाख बैंक बैलेंस, और 40 लाख रुपये का वाहन है। उनकी पत्नी के पास 75 हजार नकद, 1.22 लाख रुपये बैंक में, और 3 लाख रुपये का सोना है।
दोनों के पास 2 करोड़ रुपये की कृषि और वाणिज्यिक भूमि है। हालांकि, उन पर 80 लाख रुपये का बैंक कर्ज भी है। दिलचस्प बात यह है कि 2020 में उनकी संपत्ति 84 लाख रुपये थी, यानी पांच साल में उनकी संपत्ति में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है। उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला भी दर्ज है।
5. रेणु देवी – पूर्व डिप्टी सीएम और करोड़ों की मालकिन
पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री रेणु देवी, जो राज्य की पूर्व उपमुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं, के पास 7.83 करोड़ रुपये की संपत्ति है। उन्होंने अपने हलफनामे में बताया कि उनके पति के नाम से कोलकाता में फ्लैट, और पटना व बेतिया में मकान एवं जमीन हैं। बैंकों से उन पर 5.46 लाख रुपये का कर्ज है। रेणु देवी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 23.66 लाख रुपये का आयकर रिटर्न दाखिल किया है, जबकि 2021-22 में उनकी आय 14 लाख रुपये थी — यानी उनकी सालाना आय में तेज़ी से वृद्धि हुई है।
बिहार चुनाव 2025 के हलफनामों से एक बार फिर यह बात साबित हुई है कि राज्य की राजनीति में "जनसेवक अब जनसेठ" बन चुके हैं। जहां एक ओर जनता महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है, वहीं मंत्रियों और उनके परिवारों की संपत्ति हर साल कई गुना बढ़ रही है। इन हलफनामों ने न सिर्फ बिहार की जनता को चौंकाया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा किया है — क्या राजनीति अब जनसेवा नहीं, बल्कि संपत्ति बढ़ाने का जरिया बन चुकी है?






