BIHAR ELECTION : बिहार विधानसभा चुनाव-2025 को लेकर सियासी सरगर्मी अब तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को अपनी प्रदेश चुनाव समिति की औपचारिक घोषणा कर दी। समिति में कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है, जिन पर चुनावी रणनीति बनाने और संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की जिम्मेदारी होगी। भाजपा ने साफ कर दिया है कि इस बार चुनाव में पार्टी पूरी मजबूती और नई रणनीति के साथ मैदान में उतरने वाली है। समिति की घोषणा के साथ ही प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।
प्रदेश चुनाव समिति में केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश नेतृत्व के बीच तालमेल को प्राथमिकता दी गई है। इसमें केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल किए गए हैं। पार्टी ने कोशिश की है कि सभी जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधा जाए, ताकि विपक्ष को चुनौती दी जा सके। समिति में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी का मार्गदर्शन रहेगा। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल को समिति का समन्वयक बनाया गया है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, राधा मोहन सिंह, गिरिराज सिंह, नन्दकिशोर यादव, नित्यानन्द राय, मंगल पाण्डेय, डॉ संजय जायसवाल, भीखूभाई दलसानिया, रविशंकर प्रसाद, रेणु देवी, प्रेम कुमार, जनक चमार, प्रेम रंजन पटेल का नाम शामिल है। वहीं पदेन सदस्य के तहत धर्मशीला गुप्ता को जगह मिली है। इसके साथ ही विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में विनोद तावड़े, दीपक प्रकाश और नागेन्द्र जी का नाम शमिल है।
भाजपा की रणनीति इस बार सुशासन, विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर केंद्रित रहने वाली है। पार्टी का मानना है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं—जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला, जनधन और किसान सम्मान निधि—को घर-घर तक पहुंचाने का फायदा चुनाव में मिलेगा। साथ ही, प्रदेश में गठबंधन की स्थिति और सीट बंटवारे पर भी यह समिति मंथन करेगी। भाजपा के भीतर यह संदेश दिया गया है कि “2025 का चुनाव संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत से ही जीता जाएगा।”
भाजपा की इस घोषणा को विपक्षी दलों के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा है। महागठबंधन के दल अभी भी उम्मीदवारों और सीट बंटवारे पर आपसी सहमति बनाने में लगे हुए हैं, जबकि भाजपा ने चुनाव समिति बनाकर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की शुरुआत कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समिति की घोषणा से भाजपा को संगठनात्मक मजबूती और चुनावी एकजुटता मिलेगी। यह भी माना जा रहा है कि भाजपा की नजर न सिर्फ अपने पारंपरिक वोट बैंक पर है, बल्कि वह युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं को भी आकर्षित करना चाहती है।
चुनाव समिति की घोषणा के बाद प्रदेश भर के भाजपा कार्यालयों और जिलों में बैठकें शुरू हो गई हैं। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे आगामी दो महीनों में हर बूथ तक पहुंचें और केंद्र-राज्य सरकार की उपलब्धियों को आम जनता तक पहुंचाएं।






