बिहार शिक्षा विभाग ने राज्यभर के 200 से अधिक स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के दिसंबर महीने के वेतन में 10 प्रतिशत की कटौती करने का कड़ा निर्णय लिया है। यह कार्रवाई विशेष रूप से उन स्कूलों के खिलाफ की गई है, जहां छात्रों के अपार कार्ड बनाने का कार्य अत्यंत धीमी गति से चल रहा था। विभाग ने पहले ही आदेश जारी किया था कि सभी स्कूल दिसंबर अंत तक अपने सभी छात्रों के अपार कार्ड बना लें, लेकिन कई स्कूलों में यह कार्य अब तक अधूरा पड़ा है, जिसके परिणामस्वरूप यह कठोर कदम उठाया गया।
शेखपुरा जिले में विशेष ध्यान
इस फैसले का सबसे अधिक असर शेखपुरा जिले के स्कूलों पर पड़ा है। शेखपुरा के 39 निजी स्कूलों ने अब तक अपार कार्ड बनाने की प्रक्रिया ही शुरू नहीं की है। इस स्थिति के कारण, जिला शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि राज्य मुख्यालय के निर्देश पर यह कार्रवाई लागू की गई है। अब जिला प्रशासन इन स्कूलों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की योजना बना रहा है।
शिक्षकों का विरोध
शिक्षा विभाग द्वारा उठाए गए इस कदम का विरोध भी शुरू हो गया है। स्कूल के शिक्षकों ने इसे प्रताड़ना और उनके कार्य की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर डालने वाला कदम करार दिया है। उनका कहना है कि वेतन में कटौती से कार्यस्थल पर एक नकारात्मक वातावरण उत्पन्न होगा, जो शिक्षा के स्तर पर भी असर डाल सकता है। शिक्षकों का यह भी कहना है कि यह कदम उनकी मेहनत को नजरअंदाज करता है, जबकि उनका उद्देश्य छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान करना है।
अंतिम समय तक कार्य पूरा करने का आदेश
शिक्षा विभाग का यह आदेश स्पष्ट है कि सभी स्कूलों को दिसंबर अंत तक अपने छात्रों के अपार कार्ड बनाने होंगे। यह कदम छात्रों के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभाग ने सभी स्कूलों को चेतावनी दी है कि यदि अपार कार्ड बनाने की प्रक्रिया में और देरी होती है, तो इसके खिलाफ और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बिहार शिक्षा विभाग का यह कदम एक ओर जहां प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण दिखता है, वहीं शिक्षकों और विद्यालय प्रशासन से मिल रहे विरोध को भी समझा जा सकता है। हालांकि, अगर अपार कार्ड बनाना छात्रों के भविष्य के लिए लाभकारी साबित हो, तो यह कदम समय की आवश्यकता के अनुसार उचित माना जा सकता है।




