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Success Story: गोलगप्पे बेचने वाले का बेटा बना IITian, संसाधनों की कमी के बावजूद कड़ी मेहनत से हासिल किया मुकाम

Success Story: जब सपने पक्के हों और इरादे मजबूत, तो हालात चाहे जैसे भी हों, मंज़िल मिल ही जाती है। ऐसा ही कुछ 19 वर्षीय हर्ष गुप्ता ने कर दिखाया है। जानिए... सफलता की कहानी!

Success Story
सफलता की कहानी
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PRIYA DWIVEDI
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Success Story: जब सपने पक्के हों और इरादे मजबूत, तो हालात चाहे जैसे भी हों, मंज़िल मिल ही जाती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है महाराष्ट्र के कल्याण के 19 वर्षीय हर्ष गुप्ता ने। एक साधारण पानीपुरी विक्रेता के बेटे हर्ष ने IIT Roorkee में दाखिला लेकर न सिर्फ अपने परिवार का सिर गर्व से ऊँचा किया है, बल्कि उन लाखों युवाओं को भी नई उम्मीद दी है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं।


हर्ष का सफर आसान नहीं था। उनकी ज़िंदगी में एक समय ऐसा भी आया जब वे कक्षा 11वीं में असफल हो गए। साथियों ने मजाक उड़ाया, अपमानजनक ताने दिए गए।  "गोलगप्पे वाले का बेटा IIT जाएगा?" पर हर्ष ने उन तानों को सीढ़ी बनाया और खुद को साबित करने का ठान लिया।


उन्होंने दूसरी बार 12वीं की परीक्षा पास की, और फिर अपने सपनों की दिशा में अगला कदम उठाया — कोटा, जहां देशभर से छात्र JEE की तैयारी करने आते हैं। हर्ष के लिए कोटा का सफर आसान नहीं था। आर्थिक तंगी हर कदम पर चुनौती देती रही, लेकिन पिता का हौसला और मां की दुआएं उनके साथ थीं।


कोटा में हर्ष ने रोजाना 10–12 घंटे पढ़ाई की। उन्होंने खुद से एक वादा किया था। IIT में दाखिला लेना है, चाहे जो भी हो। उन्होंने पहले JEE Mains में 98.59 प्रतिशताइल स्कोर किया और फिर JEE Advanced भी पास किया। हालांकि, पहली बार उन्हें मनचाहा संस्थान नहीं मिला, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।


हर्ष ने एक साल और तैयारी की और आखिरकार उनका सपना IIT Roorkee में प्रवेश पाकर पूरा हुआ।


हर्ष कहते हैं, "असफलता किसी की पहचान नहीं होती, ये तो शुरुआत होती है एक नए रास्ते की। अगर आपके पास आत्मविश्वास है और सही दिशा में मेहनत करने का जुनून है, तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती। आज वे सिर्फ IITian नहीं हैं, बल्कि एक प्रेरणा हैं उन युवाओं के लिए जो यह मान बैठे हैं कि संसाधन नहीं हैं तो सफलता नहीं मिल सकती।


IIT Roorkee में दाखिला मिलने के बाद हर्ष का अगला लक्ष्य है UPSC की परीक्षा पास कर देश सेवा करना। वे चाहते हैं कि उनके दो छोटे भाई भी पढ़ाई में आगे बढ़ें और उनके जैसी ही सफलता हासिल करें। वे आज अपने परिवार की उम्मीद हैं और समाज के लिए प्रेरणादायक आदर्श।


यह कहानी बताती है कि ताने गिराने के लिए नहीं होते, बल्कि उड़ने की ताकत जगाने के लिए होते हैं। जब हालात कठिन हों, तब आपके हौसले की असली परीक्षा होती है। और हर्ष गुप्ता की तरह, अगर आप डटे रहें, तो कोई भी सपना दूर नहीं।

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रिपोर्टर / लेखक

PRIYA DWIVEDI

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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