छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ IAS अधिकारी निरंजन दास को गिरफ्तार किया है। ईडी का दावा है कि इस घोटाले में निरंजन दास ने लगभग 18 करोड़ रुपये लाभ प्राप्त किए। एजेंसी ने कहा कि इस पूरे रैकेट को सुगम बनाने में निरंजन दास की सबसे अहम भूमिका रही।
गिरफ्तारी और कानूनी प्रावधान
निरंजन दास को ईडी ने रायपुर जोनल कार्यालय से 19 दिसंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया। धन शोधन की जांच राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी।
घोटाले में भूमिका और मासिक लाभ
ईडी ने आरोप लगाया कि निरंजन दास शराब सिंडिकेट के सक्रिय सहभागी थे। उन्हें अतिरिक्त प्रभार के रूप में आबकारी आयुक्त और आबकारी विभाग का सचिव बनाया गया था ताकि घोटाले को सुगम बनाया जा सके। एजेंसी के अनुसार, आबकारी आयुक्त के रूप में उन्होंने सरकारी राजस्व की लूट को सुगम बनाया और मासिक 50 लाख रुपये के भुगतान के बदले सिंडिकेट को बिना रोकटोक संचालन करने दिया। इसके अलावा, दास ने अपने क्षेत्राधिकार में अवैध और बिना हिसाब की शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देशित किया।
अन्य गिरफ्तारियां और आरोप
निरंजन दास के अलावा, ईडी ने इस मामले में कई अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया है। इनमें पूर्व IAS अधिकारी अनिल टूटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, भारतीय दूरसंचार सेवा अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी, पूर्व छत्तीसगढ़ आबकारी मंत्री और विधायक कवासी लकमा, चैतन्य बघेल और सौम्या चौरसिया शामिल हैं।
चैतन्य बघेल पर आरोप और रकम
ACB/EOW ने अपनी नवीनतम अनुपूरक आरोपपत्र में दावा किया है कि चैतन्य बघेल ने कथित घोटाले से अपने हिस्से के रूप में 200 करोड़ रुपये से 250 करोड़ रुपये प्राप्त किए। लगभग 3,800 पृष्ठों के आरोपपत्र में उन्हें 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के मामले में आरोपी के रूप में नामजद किया गया है, और इसमें सिंडिकेट के अधिकारियों और कर्मचारियों का समन्वय करने में उनकी कथित भूमिका का विवरण भी दिया गया है।
घोटाले का कुल अनुमान और धन का निवेश
एजेंसी ने आरोप लगाया कि अपराध से प्राप्त राशि शराब कारोबारी त्रिलोक सिंह ढिल्लों से जुड़े फर्म के माध्यम से भेजी गई और इसे रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश किया गया। अनुमानित कुल अपराध से प्राप्त राशि 3,500 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
घोटाले का कालखंड और प्राथमिकी
ईडी ने बताया कि 2019 से 2022 तक, जब कांग्रेस सरकार सत्ता में थी, राज्य में बेची गई हर शराब की बोतल से अवैध रूप से राशि एकत्र की गई। EOW/ACB ने जनवरी 2024 में एक प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें लगभग 70 व्यक्तियों और कंपनियों का नाम शामिल है।
इस घोटाले की जांच में शामिल अधिकारियों के अनुसार, निरंजन दास और अन्य आरोपी सिंडिकेट के मुख्य कर्ता थे, जिन्होंने सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर शराब व्यापार से अवैध लाभ कमाया। ईडी का कहना है कि आगे की जांच और दोषियों की गिरफ्तारी जारी रहेगी और पूरी प्रक्रिया में धन शोधन, भ्रष्टाचार और अन्य संबंधित अपराधों की पुष्टि होगी।





