ENGINEERING CAREER: अक्सर कहा जाता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। लेकिन जब बात इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी कोर्स की आती है, तो लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं। खासकर 40 साल की उम्र पार कर चुके लोगों के लिए यह जानना जरूरी हो जाता है कि क्या इस उम्र में बीटेक किया जा सकता है? और अगर 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स यानी PCM नहीं था, तो क्या इंजीनियरिंग का सपना पूरा हो सकता है?
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA के नियमों के अनुसार JEE Main परीक्षा देने के लिए कोई ऊपरी आयु सीमा तय नहीं है। यानी सैद्धांतिक रूप से 40 साल की उम्र में भी आप फॉर्म भर सकते हैं। लेकिन एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि उम्मीदवार ने 12वीं की परीक्षा उसी साल या पिछले दो सालों के भीतर पास की हो। ऐसे में 40 वर्ष की उम्र में नियमित श्रेणी से JEE Main देना व्यावहारिक रूप से कठिन हो जाता है।
अब सवाल आता है कि अगर 12वीं में PCM नहीं था तो क्या करें? इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए आमतौर पर 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स जरूरी माने जाते हैं। अगर आपने आर्ट्स या कॉमर्स से पढ़ाई की है, तो आप ओपन स्कूल जैसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग के जरिए अतिरिक्त विषय के रूप में PCM की परीक्षा दे सकते हैं। जब आपके पास PCM के साथ 12वीं का प्रमाणपत्र हो जाएगा, तब आप कई निजी विश्वविद्यालयों में बीटेक के लिए आवेदन कर सकते हैं।
हाल के वर्षों में ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन ने भी कुछ नियमों में बदलाव किए हैं। कुछ इंजीनियरिंग शाखाओं में अब पारंपरिक विषयों के अलावा अन्य तकनीकी विषयों को भी मान्यता दी जा रही है। हालांकि, गणित अभी भी अधिकतर कोर्स में अनिवार्य है। कई कॉलेज ‘वर्किंग प्रोफेशनल’ श्रेणी में पार्ट-टाइम बीटेक कोर्स भी चला रहे हैं, जो नौकरी करने वाले लोगों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
एक और आसान रास्ता पॉलिटेक्निक डिप्लोमा है। 10वीं के आधार पर 3 साल का डिप्लोमा किया जा सकता है। इसके बाद लेटरल एंट्री के जरिए सीधे बीटेक के दूसरे वर्ष में प्रवेश मिल सकता है। इस विकल्प में उम्र की पाबंदी अपेक्षाकृत कम होती है और पढ़ाई के साथ नौकरी भी की जा सकती है।
आज के समय में सिर्फ डिग्री ही सब कुछ नहीं है। खासकर सॉफ्टवेयर, डेटा साइंस और आईटी जैसे क्षेत्रों में स्किल की ज्यादा अहमियत है। कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और कोडिंग कोर्स कुछ महीनों में जरूरी कौशल सिखा देते हैं। कई कंपनियां अब डिग्री से ज्यादा प्रोजेक्ट और अनुभव को महत्व देती हैं।






