Bihar Matric Exam: बिहार के भागलपुर जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो हर किसी की आंखें नम कर देगी। यह कहानी है 10वीं की छात्रा प्रिया कुमारी की, जिसने पिता के निधन के कुछ ही घंटों बाद मैट्रिक की परीक्षा दी।
भागलपुर जिले के घोघा थाना क्षेत्र के जानीडीह गांव में रहने वाले राजकिशोर महतो पिछले करीब 22 महीनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें मुंह का कैंसर था। बीमारी इतनी बढ़ गई थी कि इलाज के दौरान उनकी जीभ का ऑपरेशन करना पड़ा। वे बोल नहीं पाते थे और नाक में लगी पाइप से तरल आहार लेते थे। पूरा परिवार उनकी सेवा में लगा था और उनके ठीक होने की उम्मीद कर रहा था।
लेकिन शुक्रवार की रात परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। राजकिशोर महतो का निधन हो गया। घर में मातम छा गया। इसी बीच उनकी बेटी प्रिया के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी थी। अगले ही दिन उसकी मैट्रिक परीक्षा थी।
आधी रात को टूटा सहारा
पिता के निधन से प्रिया पूरी तरह टूट गई थी। जिस घर में सुबह उसे परीक्षा की तैयारी करनी थी, वहां पिता का पार्थिव शरीर रखा हुआ था। उसका मन परीक्षा देने का नहीं था। वह गहरे सदमे में थी।
लेकिन परिवार और गांव के लोगों ने उसे हिम्मत दी। सभी ने उसे समझाया कि उसके पिता का सपना था कि वह पढ़-लिखकर आगे बढ़े। अगर वह परीक्षा नहीं देगी, तो पिता की इच्छा अधूरी रह जाएगी।
अपनों की बात सुनकर प्रिया ने खुद को संभाला। आंखों में आंसू थे, लेकिन मन में एक मजबूत फैसला भी था।
भारी मन से पहुंची परीक्षा केंद्र
सुबह पहली पाली में परीक्षा थी। घर में शोक का माहौल था, लेकिन प्रिया ने हिम्मत जुटाई और परीक्षा केंद्र के लिए निकल पड़ी। परीक्षा केंद्र पर भी उसके साहस की चर्चा होती रही।
दुख के बावजूद उसने पूरे ध्यान से अपना पेपर लिखा। उसने यह साबित कर दिया कि मुश्किल हालात भी उसके हौसले को नहीं तोड़ सकते।
परीक्षा के बाद निभाया बेटी का फर्ज
परीक्षा खत्म होते ही प्रिया सीधे घर लौटी। वहां पिता की अंतिम यात्रा की तैयारी हो रही थी। उसने परिवार के साथ मिलकर पिता को अंतिम विदाई दी।
एक तरफ उसने अपने भविष्य की जिम्मेदारी निभाई, तो दूसरी ओर बेटी होने का कर्तव्य भी पूरा किया।
पूरे इलाके में हो रही सराहना
प्रिया कुमारी की यह कहानी सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि हिम्मत और संकल्प की मिसाल है। उसने दिखा दिया कि दुख चाहे कितना भी बड़ा हो, अगर इरादा मजबूत हो तो इंसान अपने रास्ते से नहीं डिगता।
आज भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में लोग उसकी बहादुरी की सराहना कर रहे हैं। उसकी कहानी उन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो छोटी-छोटी परेशानियों में हार मान लेते हैं।






