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Taj Mahal Income : ताजमहल की कमाई कितनी ? हर साल होती है अरबों की आमदनी ?

Taj Mahal Income : ताजमहल—एक ऐसा नाम जो प्रेम, कला और इतिहास का प्रतीक बन चुका है। मुग़ल सम्राट शाहजहां द्वारा अपनी प्रिय बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया गया यह स्मारक, आज न केवल विश्व धरोहरों में गिना जाता है|

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प्रतीकात्मक तस्वीर
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Nitish KumarNitish Kumar|
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Taj Mahal Income : ताजमहल सिर्फ मुग़ल सम्राट शाहजहां के प्रेम की निशानी नहीं है, बल्कि आज यह भारत की सबसे अधिक कमाई करने वाली ऐतिहासिक धरोहर बन चुका है। जब शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज  की याद में इस शानदार स्मारक का निर्माण करवाया था, तो शायद उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी कि आने वाले समय में यह न सिर्फ विश्व धरोहर का दर्जा पाएगा, बल्कि पर्यटन से करोड़ों की कमाई का ज़रिया भी बनेगा।


भारत की सबसे कमाऊ धरोहर

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, ताजमहल देश की सबसे अधिक राजस्व कमाने वाली धरोहर है। पिछले पांच वर्षों में केवल टिकट बिक्री से इसने लगभग 297 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में ताजमहल सबसे ऊपर रहा, जबकि दिल्ली का कुतुब मीनार 23.8 करोड़ रुपये के साथ दूसरे और लालकिला 18.08 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर रहा।


सरकार ने संसद में रखे आंकड़े

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में इन आंकड़ों की पुष्टि की। उन्होंने 2019-20 से लेकर 2023-24 तक के राजस्व का ब्योरा दिया और बताया कि हर साल अलग-अलग धरोहरें अलग-अलग स्थानों पर रही हैं। उदाहरण के लिए, 2020 में आगरा किला और कुतुब मीनार क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे, जबकि 2021 में तमिलनाडु के महाबलीपुरम और ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर शीर्ष स्थानों में थे।


22 वर्षों की मेहनत का नतीजा

ताजमहल का निर्माण कार्य 1632 में शुरू हुआ और इसे बनने में पूरे 22 वर्ष लगे। 1653 में इसका निर्माण पूरा हुआ। मुमताज महल की मृत्यु के बाद शाहजहां ने इस स्मारक को बनवाने का फैसला किया था। यह स्मारक उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में यमुना नदी के किनारे स्थित है और यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त कर चुका है। इसकी वास्तुकला में फारसी, इस्लामी और भारतीय शैलियों का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है।

निर्माण लागत और निर्माण सामग्री

(ASI) की रिपोर्ट के अनुसार, ताजमहल के निर्माण में उस समय करीब 320 लाख रुपये खर्च हुए थे, जो आज की मुद्रा में लगभग 7 लाख करोड़ रुपये या लगभग 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर हो सकते हैं। इसे बनाने में करीब 20,000 कारीगरों ने दिन-रात मेहनत की। निर्माण में प्रयुक्त सफेद संगमरमर राजस्थान से मंगवाया गया था, जबकि अन्य कीमती पत्थर अफगानिस्तान, तिब्बत और अरब देशों से लाए गए थे।

पर्यटन का प्रमुख केंद्र

ठंड के मौसम—अक्टूबर, नवंबर और फरवरी के दौरान—ताजमहल में सबसे अधिक पर्यटक आते हैं। सालाना औसतन 70 से 80 लाख पर्यटक इस ऐतिहासिक स्थल का दीदार करते हैं, जिनमें से 8 लाख से अधिक विदेशी सैलानी होते हैं। इस प्रकार, ताजमहल न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, बल्कि एक वैश्विक आकर्षण और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्मारक भी बन चुका है।

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Nitish Kumar

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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