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एडमिशन कराना है तो पैसे तो देने पड़ेंगे... नामांकन के नाम पर हेडमिस्ट्रेस ने लिए रुपये, वीडियो वायरल

Bihar News: मोतिहारी के एक सरकारी स्कूल से नामांकन को लेकर एक मामला सामने आया है। स्कूल की प्रधानाध्यापिका का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसके बाद ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच की मांग की...

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 18, 2026, 11:39:59 AM

एडमिशन कराना है तो पैसे तो देने पड़ेंगे... नामांकन के नाम पर हेडमिस्ट्रेस ने लिए रुपये, वीडियो वायरल

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Bihar News: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी प्रखंड से शिक्षा व्यवस्था को कलंकित कर देने वाला मामला सामने आया है। राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, भरहुलिया लक्ष्मीपुर की हेडमिस्ट्रेस का स्कूल में एडमिशन के नाम पर रुपये लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं।


वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि स्कूल में बच्चे के नामांकन को लेकर एक अभिभावक हेडमिस्ट्रेस से बात कर रहा है। इसी दौरान हेडमिस्ट्रेस रुपये लेते हुए नजर आ रही हैं। जानकारी के अनुसार नए एडमिशन के लिए 500 रुपये मांगे जा रहे थे। अभिभावक द्वारा काफी अनुरोध करने के बाद 100 रुपये दिए गए, जिसे हेडमिस्ट्रेस ने अपने पर्स में रख लिया। पूरा घटनाक्रम वहीं मौजूद किसी व्यक्ति ने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।


घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सरकार सरकारी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा देने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर गरीब परिवारों से एडमिशन के नाम पर पैसे लिए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि स्कूल में लंबे समय से इस तरह की व्यवस्था चल रही थी।


सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि वीडियो में स्कूल परिसर के अंदर हेडमिस्ट्रेस के पति बबलू यादव भी मौजूद दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर सरकारी स्कूल में किसी बाहरी व्यक्ति की भूमिका क्या है और वह स्कूल के अंदर क्या कर रहा था।


सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग लगातार शिक्षा विभाग पर सवाल उठा रहे हैं। कई लोगों ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। अभिभावकों का कहना है कि गरीब और मजदूर परिवार अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए सरकारी स्कूलों पर भरोसा करते हैं, लेकिन अगर वहां भी नामांकन के लिए पैसे देने पड़ें तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।