1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 06, 2026, 12:41:21 PM
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Patna PMCH Negligence: बिहार की राजधानी पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है. सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 16 वर्षीय किशोर की इलाज के दौरान मौत हो गई. परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि समय पर इलाज मिल जाता तो शायद अमन की जान बचाई जा सकती थी.
मृतक की पहचान पटना के आनंदपुरी निवासी अमन कुमार गुप्ता के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि वह एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था. हादसे में उसका बायां पैर बुरी तरह टूट गया था, जबकि सिर में भी गंभीर चोट लगी थी. परिजन उसे आनन-फानन में एक निजी एम्बुलेंस से इलाज के लिए पीएमसीएच लेकर पहुंचे.
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी अमन को तुरंत भर्ती नहीं किया गया. करीब एक घंटे तक वह एम्बुलेंस के अंदर ही दर्द से तड़पता रहा, लेकिन उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराने के लिए कोई तत्परता नहीं दिखाई गई. इस दौरान परिवार के लोग मदद की गुहार लगाते रहे.
घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में घायल अमन एम्बुलेंस के अंदर दर्द से कराहता दिखाई दे रहा है. एम्बुलेंस कर्मियों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने तक अमन पूरी तरह होश में था और बातचीत भी कर रहा था.
काफी देर बाद उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया. लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई. भर्ती होने के करीब चार घंटे बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. बेटे की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठ रहे हैं. लोगों का कहना है कि अगर किसी गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचने के बाद भी समय पर इलाज नहीं मिले, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है.
मामले के तूल पकड़ने के बाद पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने अपनी सफाई दी है. उन्होंने कहा कि मरीज को भर्ती करने के बाद करीब चार घंटे तक डॉक्टरों की टीम ने इलाज किया था और उसे बचाने की पूरी कोशिश की गई. हालांकि गंभीर चोटों के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी.
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि गंभीर मरीजों को बिना देरी भर्ती कर इलाज शुरू करने के निर्देश पहले से दिए गए हैं. वहीं इस घटना के बाद पूरे मामले की जांच की जा रही है. अब यह जांच का विषय है कि इलाज शुरू होने में वास्तव में देरी हुई थी या नहीं और अगर लापरवाही हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी.