NEET student : बिहार में NEET छात्रा की मौत के मामले को लेकर महिला अधिकार संगठनों AISA और APWA की कार्यकर्ताओं ने पटना विधानसभा तक मार्च निकालकर सरकार को घेरने की कोशिश की। इस मार्च में महिलाएं, छात्राएं और समाजिक कार्यकर्ता राज्य में महिलाओं, बच्चियों और छात्राओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और प्रशासनिक संरक्षण में हो रहे अपराधों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद कर रही थीं।
गांधी मैदान से यह मार्च दोपहर 12.30 बजे शुरू हुआ। महिलाएं और छात्राएं हाथ में बैनर और पोस्टर लेकर पटना की सड़कों पर उतरीं। उनका नारा था, “सरकारी नारा बेटी बचाओ, सरकारी मंशा बलात्कारी बचाओ” और “NDA की ये सरकार नहीं चलेगी अबकी बार, JDU की ये सरकार नहीं चलेगी अबकी बार।” यह स्पष्ट रूप से राज्य सरकार के खिलाफ गहरी नाराजगी का संकेत था। मार्च की शुरुआत के बाद महिलाओं का समूह जेपी गोलंबर की ओर बढ़ा, जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की।
महिलाओं ने बैरिकेडिंग तोड़कर डाकबंगला की ओर मार्च जारी रखा। डाकबंगला चौराहे पर भी पुलिस ने बैरिकेडिंग कर विरोध को नियंत्रित करने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी महिलाएं आमने-सामने आ गईं। DSP कृष्ण मुरारी मौजूद थे और महिलाएं आगे बढ़ने से रोकने के लिए समझाने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि महिलाएं बैरिकेडिंग तोड़कर विधानसभा की ओर बढ़ती रहीं। स्थिति तनावपूर्ण होने के कारण पुलिस ने वाटर कैनन की गाड़ी भी बुलाई।
इस मार्च की शुरुआत ‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’ से हुई थी, जिसकी शुरुआत 4 फरवरी को जहानाबाद से की गई थी। यह यात्रा NEET छात्रा के गांव से शुरू होकर नालंदा, नवादा, गया और अरवल से होते हुए सोमवार को पटना में समाप्त हुई। यात्रा का मकसद राज्य में महिलाओं, बच्चियों और छात्राओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा के मामलों पर ध्यान आकर्षित करना और न्याय की मांग करना था।
महिलाएं, छात्राएं और कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और राज्य में कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर सवाल उठा रहे थे। उनके हाथों में बैनर और पोस्टर थे जिनमें लिखा था कि सरकार बलात्कारी संरक्षण में लगी है और महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा नहीं कर रही।
पुलिस ने मार्च को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए। जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहे पर बैरिकेडिंग लगाई गई। DSP कृष्ण मुरारी और अन्य पुलिस अधिकारी पर मौजूद थे और महिलाओं को समझाने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि महिलाओं ने पुलिस की रोकथाम के बावजूद आगे बढ़ना जारी रखा। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने वाटर कैनन का सहारा लिया।
इस मार्च के दौरान महिलाओं ने साफ संदेश दिया कि राज्य में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ हो रहे अपराधों पर चुप नहीं बैठा जाएगा। उन्होंने सरकार से न्याय और सुरक्षा की मांग की। मार्च के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव भी देखने को मिला, लेकिन महिलाएं शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा तक पहुंचने का प्रयास करती रहीं।
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से यह मार्च राज्य में बढ़ती महिलाओं के खिलाफ अपराधों के खिलाफ एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। AISA और APWA जैसी महिला संगठनों ने स्पष्ट कर दिया कि वह ऐसे मामलों में निष्क्रिय नहीं रहेंगी और न्याय की आवाज़ उठाते रहेंगी। मार्च का समापन पटना में विधानसभा परिसर के पास होने की संभावना है, जहां महिलाएं अपनी मांगों को लेकर सरकार तक संदेश पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं।
इस मार्च ने यह भी दिखाया कि बिहार में छात्राएं और महिलाएं न्याय और सुरक्षा के लिए संगठित होकर आवाज़ उठा सकती हैं। NEET छात्रा के मामले ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है और महिलाओं की सुरक्षा और सरकार की जवाबदेही पर प्रश्न खड़ा किया है।






