Tejashwi Yadav : बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राज्य की कानून-व्यवस्था और परीक्षा प्रबंधन को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बिहार में चल रही नीतीश कुमार और भाजपा की सरकार बेटियों के लिए “काल” बन चुकी है।
तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में पटना जिले के मसौढ़ी थाना क्षेत्र की 10वीं की छात्रा की मौत का जिक्र करते हुए इसे सरकारी अव्यवस्था का परिणाम बताया। उन्होंने लिखा कि कुछ मिनट की देरी के कारण परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलने से आहत छात्रा ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। तेजस्वी ने इसे केवल एक छात्रा की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता करार दिया।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, मसौढ़ी की रहने वाली दसवीं की छात्रा अपनी पहली बोर्ड परीक्षा देने जा रही थी। रास्ते में जाम और अव्यवस्था के कारण वह परीक्षा केंद्र कुछ मिनट देर से पहुंची। नियमों का हवाला देते हुए उसे केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया।
परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्रा ने काफी अनुरोध किया, लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई। इस घटना से वह बेहद आहत हो गई और बाद में उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। घटना के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।
तेजस्वी का आरोप
तेजस्वी यादव ने कहा कि यह केवल स्कूल का दरवाजा बंद होना नहीं था, बल्कि एक बेटी के भविष्य और सपनों का दरवाजा बंद कर दिया गया। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में अव्यवस्था का आलम है—हर परीक्षा में जाम, कुप्रबंधन और बदइंतजामी देखने को मिलती है। उन्होंने लिखा कि बिहार की बेटियां परीक्षा केंद्र के बाहर रो रही हैं, लेकिन उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। अगर ऐसी घटनाएं नहीं रुकीं तो हालात और भयावह हो सकते हैं।
मुआवजे और नियमों में बदलाव की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से मांग की है कि कोमल कुमारी के परिजनों को अविलंब मुआवजा दिया जाए। साथ ही परीक्षा केंद्रों पर कुछ मिनट की देरी से पहुंचने वाले छात्रों को मानवीय आधार पर प्रवेश देने का प्रावधान किया जाए। तेजस्वी ने कहा कि एक-दो मिनट की देरी किसी बेटी की जान से ज्यादा कीमती नहीं हो सकती। उन्होंने समाज से भी अपील की कि ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाई जाए ताकि भविष्य में किसी और छात्रा को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े।
राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
इस घटना के बाद बिहार में परीक्षा प्रबंधन, ट्रैफिक व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे सरकार की नाकामी बता रहा है, वहीं प्रशासन की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है। फिलहाल पूरे राज्य में इस घटना को लेकर गहरा दुख और आक्रोश है। सवाल यह है कि क्या सरकार परीक्षा नियमों में लचीलापन और मानवीय दृष्टिकोण अपनाएगी, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।






