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इतने से ज्यादा आय वालों की LPG सब्सिडी होगी बंद, 234.65 लाख उपभोक्ता आए रडार पर; भेजा जा रहा अलर्ट मैसेज

LPG Subsidy India: बिहार में 10 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले एलपीजी उपभोक्ताओं की गैस सब्सिडी बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लाखों लोगों को अलर्ट मैसेज भेजा गया है और उन्हें 7 दिन में आपत्ति दर्ज करने का मौका दिया गया है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jun 02, 2026, 11:47:59 AM

LPG Subsidy India

प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

LPG Subsidy India: बिहार में एलपीजी उपभोक्ताओं के बीच हलचल मच गई है, क्योंकि 10 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले उपभोक्ताओं की गैस सब्सिडी बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत तेल कंपनियों ने लाखों उपभोक्ताओं को अलर्ट मैसेज भेजना शुरू कर दिया है।


तीनों सरकारी गैस कंपनियों (IOC, BPCL और HPCL) ने यह फैसला लिया है कि जिन उपभोक्ताओं या उनके परिवार की वार्षिक आय 10 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें सब्सिडी के दायरे से बाहर किया जाएगा। ऐसे उपभोक्ताओं को अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है।


सूत्रों के अनुसार पटना सहित पूरे बिहार में करीब 20 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को यह अलर्ट मैसेज भेजा गया है। संदेश में साफ चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय में जवाब नहीं देने पर सब्सिडी स्वतः समाप्त कर दी जाएगी। बिहार में कुल 234.65 लाख एलपीजी उपभोक्ता हैं, जिनमें IOC के 110.57 लाख, BPCL के 57.05 लाख और HPCL के 67.01 लाख उपभोक्ता शामिल हैं। अकेले पटना में 13 लाख से अधिक एलपीजी उपभोक्ता हैं।


नई व्यवस्था से सरकारी कर्मचारी, अधिकारी, व्यापारी और उच्च आय वर्ग के उपभोक्ता सीधे प्रभावित होंगे। सरकार का उद्देश्य केवल पात्र और जरूरतमंद लोगों को ही सब्सिडी उपलब्ध कराना है। गैस कंपनियों ने मृत उपभोक्ताओं के कनेक्शनों की भी जांच शुरू कर दी है। 


आधार डाटाबेस के जरिए ऐसे कनेक्शनों की पहचान की जा रही है जिनके धारक अब जीवित नहीं हैं। कंपनियों ने निर्देश दिया है कि जिन उपभोक्ताओं की मृत्यु हो चुकी है, उनके परिवार को 30 दिनों के भीतर कनेक्शन को किसी वैध सदस्य के नाम ट्रांसफर कराना होगा, अन्यथा कनेक्शन बंद कर दिया जाएगा।


यदि किसी उपभोक्ता को इस कार्रवाई पर आपत्ति है, तो वे टोल फ्री नंबर 1800-2333-555 पर संपर्क कर सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के निर्देश पर की जा रही है और संदेश सीधे मुख्यालय स्तर से भेजे जा रहे हैं।