1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 22, 2026, 12:28:39 PM
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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चर्चित IRCTC होटल टेंडर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शुक्रवार को एक बार फिर सुनवाई हुई, लेकिन अदालत ने आरोप तय करने पर अपना फैसला फिलहाल टाल दिया। अब इस मामले में अगली सुनवाई 9 जून को होगी, जब कोर्ट आरोप तय करने को लेकर आदेश सुनाएगा। इस केस में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख Lalu Prasad Yadav, Rabri Devi, Tejashwi Yadav, Tej Pratap Yadav और Misa Bharti समेत कई आरोपी प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई की जांच के दायरे में हैं।
इससे पहले 6 मई को भी मामले की सुनवाई हुई थी, लेकिन उस दिन भी अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट पहले ही आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है और अब सभी पक्षों की दलीलों पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि आगामी सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से मुकदमा चलाया जाए या नहीं।
यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2004 से 2009 के बीच भारतीय रेलवे के अधीन आने वाले रांची और पुरी स्थित बीएनआर होटलों को आईआरसीटीसी के जरिए निजी कंपनियों को लीज पर देने की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां की गई थीं। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित कर कुछ खास कंपनियों को अनुचित फायदा पहुंचाया गया।
सीबीआई और ईडी का दावा है कि होटल टेंडर देने के बदले लालू परिवार से जुड़ी कंपनियों को पटना में बेहद कीमती जमीन ट्रांसफर की गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को नियमों को नजरअंदाज करते हुए ठेका दिया गया था। इसके बदले कथित तौर पर तीन एकड़ से अधिक जमीन लालू परिवार से जुड़ी कंपनी लारा प्रोजेक्ट्स को बेहद कम कीमत पर हस्तांतरित की गई।
जांच में सामने आया कि डिलाइट मार्केटिंग लिमिटेड से यह जमीन लगभग 65 लाख रुपये में ट्रांसफर की गई, जबकि उसका वास्तविक बाजार मूल्य करीब 94 करोड़ रुपये बताया गया। वहीं, सरकारी सर्कल रेट के अनुसार भी जमीन की कीमत लगभग 32 करोड़ रुपये थी। एजेंसियों का आरोप है कि यह पूरा सौदा सत्ता और प्रभाव का इस्तेमाल कर निजी लाभ हासिल करने के उद्देश्य से किया गया।
सीबीआई ने अपनी जांच में कारोबारी विनय कोचर और विजय कोचर पर भी सवाल उठाए हैं। एजेंसी का आरोप है कि दोनों कारोबारियों को होटल टेंडर में फायदा पहुंचाने के बदले जमीन का सौदा कराया गया। कोर्ट ने भी पिछली सुनवाई में माना था कि प्रथम दृष्टया टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप और प्रभाव का इस्तेमाल किए जाने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा था कि कथित साजिश लालू यादव की जानकारी में रची गई थी और इसमें परिवार के कई सदस्य लाभार्थी के तौर पर सामने आए हैं। इसी आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी।
अब 9 जून की सुनवाई इस मामले में बेहद अहम मानी जा रही है। यदि अदालत आरोप तय कर देती है तो लालू परिवार की कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। बिहार की राजनीति में पहले से ही चर्चा का विषय बने इस मामले पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।