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Bihar News: गंगा में क्यों घट रहीं स्थानीय मछलियां? पटना विश्वविद्यालय के सर्वे में बड़ा खुलासा

पटना के आसपास गंगा नदी में स्थानीय प्रजाति की मछलियों की संख्या तेजी से घट रही है। पटना विश्वविद्यालय के सर्वे के अनुसार पिछले 15 वर्षों में स्थानीय मछलियों में 31% और कुल शिकारमाही में 40–50% तक गिरावट दर्ज की गई है।

Bihar News
प्रतिकात्मक तस्वीर
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Mukesh Srivastava
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Bihar News: बिहार के मछली प्रेमियों के लिए चिंता की खबर है। गंगा नदी के पटना के आसपास लगभग 30 किमी क्षेत्र में स्थानीय प्रजाति की मछलियों की संख्या लगातार घट रही है। पिछले 15 वर्षों में यहां स्थानीय प्रजाति की मछलियों में करीब 31 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि कुल संख्या में 40 से 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है। यह जानकारी पटना विश्वविद्यालय द्वारा किए गए सर्वे में सामने आई है।


मछुआरा समितियों ने भी सर्वे के निष्कर्षों की पुष्टि करते हुए कहा है कि गंगा में स्थानीय मछलियों की संख्या तेजी से घट रही है। पटना विश्वविद्यालय के पूर्व शिक्षक और ‘डॉल्फिन मैन’ के नाम से प्रसिद्ध डॉ. रवीन्द्र कुमार सिन्हा के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण कारण गंगा में विदेशी थाई मांगुर (अफ्रीकी प्रजाति) का प्रवेश है।


केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सिफरी) ने वर्ष 2010-11 में गंगा नदी में मछलियों की प्रजातियों को लेकर सर्वे किया था। इस रिपोर्ट में पटना के आसपास गंगा में केवल 40 प्रजाति की मछलियों का उल्लेख किया गया। हालांकि कई विशेषज्ञों ने इस सर्वे पर सवाल उठाते हुए नए सर्वे की मांग की, लेकिन अब तक पटना या बिहार में सिफरी की ओर से दोबारा सर्वे नहीं कराया गया है।


मछलियों की प्रजातियों के साथ-साथ उनकी संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है। बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ (कॉफ्फेड) के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप के अनुसार पिछले एक दशक में गंगा नदी में मछलियों की शिकारमाही में 40 से 50 प्रतिशत तक कमी आई है। उनका कहना है कि पटना और आसपास के क्षेत्रों में मछुआरों को गंगा में केवल बाढ़ के दिनों में ही मछलियां मिल पाती हैं, जबकि बाकी समय उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।


मछलियों की संख्या घटने के प्रमुख कारण

थाई मांगुर जैसी प्रतिबंधित विदेशी प्रजातियों का बड़े पैमाने पर पालन

आर्द्रभूमि, तालाब और झीलों का सूखना व अतिक्रमण

गंगा नदी में पानी का स्तर लगातार कम होना

नदी के पानी में पेस्टिसाइड और प्रदूषण की बढ़ती मात्रा

छोटी मछलियों का अत्यधिक शिकार


पटना विश्वविद्यालय द्वारा गंगा में मछलियों को लेकर पहले भी कई सर्वे किए गए हैं। डॉ. आर.के. सिन्हा के अनुसार 1993 से 1995 के बीच 30 किमी क्षेत्र में किए गए सर्वे में 106 प्रकार की स्थानीय मछलियां पाई गई थीं। वर्ष 2007-09 में एक शोधार्थी की रिपोर्ट में भी 106 प्रजातियों का उल्लेख किया गया, जिनमें 96 स्थानीय और 10 नई प्रजातियां शामिल थीं। वहीं 2023-24 में किए गए हालिया सर्वे में केवल 78 प्रजातियों की मछलियां दर्ज की गई हैं, जिनमें थाई मांगुर सहित कई विदेशी प्रजातियां शामिल हैं।

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रिपोर्टर / लेखक

Mukesh Srivastava

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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