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Bihar Latest News : बीपीएससी नौकरी दिलाने के नाम पर 40 लाख की ठगी, जदयू नेता समेत पांच पर ईओयू की एफआईआर

पटना में बीपीएससी नौकरी दिलाने के नाम पर 40 लाख रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। EOU ने जदयू नेता डॉ. धर्मेंद्र चंद्रवंशी समेत पांच लोगों पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 21, 2026, 9:32:27 AM

Bihar Latest News : बीपीएससी नौकरी दिलाने के नाम पर 40 लाख की ठगी, जदयू नेता समेत पांच पर ईओयू की एफआईआर

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Bihar Latest News : पटना में बीपीएससी परीक्षा के जरिए सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की सेटिंग और पैसे के खेल का एक बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने कुम्हरार विधानसभा सीट से पूर्व राजद उम्मीदवार और वर्तमान जदयू नेता डॉ. धर्मेंद्र कुमार चंद्रवंशी समेत पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि बीपीएससी में नौकरी दिलाने के नाम पर पटना पुलिस में तैनात एक महिला दारोगा से 40 लाख रुपये लिए गए, लेकिन नौकरी नहीं लगने पर पैसे लौटाने का वादा भी पूरा नहीं किया गया।


ईओयू द्वारा दर्ज एफआईआर में जदयू नेता डॉ. धर्मेंद्र कुमार चंद्रवंशी के अलावा उनके पिता ब्रजकिशोर प्रसाद, पत्नी डॉ. रजनी, महिला दारोगा आशा सिंह और उनके बेटे रितेश कुमार को भी आरोपी बनाया गया है। पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी ईओयू की डीएसपी स्वाति कृष्णा को सौंपी गई है।


जानकारी के अनुसार, पटना जिला पुलिस बल में कार्यरत महिला दारोगा आशा सिंह ने अपने बेटे रितेश कुमार को बीपीएससी परीक्षा में सफल कर सरकारी नौकरी दिलाने के उद्देश्य से विभिन्न स्रोतों से बड़ी रकम जुटाई थी। आरोप है कि यह रकम डॉ. धर्मेंद्र कुमार और अन्य आरोपियों को दी गई थी। बदले में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन जब नौकरी नहीं मिली तो पैसे वापस करने की बात कही गई।


मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपियों की ओर से 25 लाख रुपये का चेक लौटाया गया, लेकिन बैंक में लगाने पर वह बाउंस कर गया। इसके बाद विवाद बढ़ा और मामला थाने से होते हुए अब आर्थिक अपराध इकाई तक पहुंच गया।


इस पूरे प्रकरण की शुरुआत जनवरी 2024 में हुई थी, जब जक्कनपुर थाना में कांड संख्या 39/2024 दर्ज कराया गया था। उस समय पुलिस ने मामले की जांच कर जुलाई 2024 में आरोप पत्र दाखिल करते हुए अनुसंधान बंद कर दिया था। हालांकि बाद में इस मामले को लेकर पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।


हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में मामले की गंभीरता को देखते हुए पुनः जांच का निर्देश दिया। इसके बाद पटना सदर के एसडीपीओ (एक) द्वारा दोबारा जांच की गई। जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट में कहा गया कि महिला दारोगा आशा सिंह ने पुलिस पदाधिकारी होने के बावजूद अपने बेटे को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए रिश्वत के तौर पर भारी रकम दी थी। जांच में यह भी सामने आया कि पैसे अलग-अलग माध्यमों से जुटाए गए थे।


ईओयू की प्राथमिकी के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। डॉ. धर्मेंद्र कुमार चंद्रवंशी जदयू के अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में पार्टी के प्रदेश महासचिव हैं। ऐसे में मामला राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील माना जा रहा है।


फिलहाल ईओयू पूरे नेटवर्क और पैसों के लेन-देन की जांच में जुट गई है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित सेटिंग नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा क्या इससे पहले भी इसी तरह नौकरी दिलाने के नाम पर लेन-देन किया गया था। मामले के सामने आने के बाद बिहार में सरकारी नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं।