Bihar Legislative Council : बिहार विधान परिषद में आज अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित आवासीय स्कूल में तैनात शिक्षकों की छुट्टी को लेकर मामला काफी गर्म रहा। इसको लेकर जदयू के एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि बिहार में नौंवा आश्चर्य हो रहा है कि शिक्षकों की छुट्टी प्रधानाचार्य नहीं बल्कि जिला कल्याण पदाधिकारी के माध्यम से प्राप्त आवेदन को मुख्यालय स्तर पर स्वीकृति दी जाती है। यह बिल्कुल नौंवा आश्चर्यजनक जनक चीज है।
नीरज कुमार ने कहा कि -शिक्षक काम कर रहे हैं स्कूल में और वहां प्रधानाध्यापक है तो उनका अधिकार पहले से था। ऐसे में तो नियमावली पर विचार करने की जरूरत है और इसको संशोधित करने की जरूरत है। इसके बाद प्रभारी मंत्री लखेंद्र कुमार रोशन ने बताया कि हमने यह जानकारी दी है कि शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित अवश्य विद्यालय में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षाओं को प्रशासनिक नियंत्रण की दृष्टि कौन से इमरजेंसी छुट्टी की बात हो या प्रतिबंधित अवकाश की जरूरत हो या फिर क्षतिपूर्वक अवकाश की बात हो इन को संबंधित प्रधानाध्यापक के अनुशंसा पर जिला कल्याण पदाधिकारी के द्वारा आवेदन मुख्यालय स्तर पर भेजा जाता है और जिसकी स्वीकृति दी जातीहै। इसके बाद सभापति ने कहा कि सदस्यों का कहना है कि यह अधिकार प्रधानाध्यापक को देना चाहिए।
इसके बाद एक एमएलसी संजय सिंह ने कहा कि महोदय विद्यालय के प्रधान जो है उनको यह अधिकार पहले से दिया गया है कि वह छुट्टी दे सकते हैं और इसको लेकर नियमावली भी पहले से बनाई गई है। लेकिन यह सारा अधिकारी यहां लेकर पैसे की कमाई की जाती है।
इसके बाद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि नहीं अगर ऐसी कोई बात है तो इसकी समीक्षा करवा ली जाएगी। शिक्षा मंत्री समीक्षा बैठक बुलाकर उसकी समीक्षा करवा लेंगे। सभापति ने भी मंत्री को यह समझाया कि पुलिस में आर्मी में यह होता है की छुट्टी नहीं दिया जाता है तो गोली चल दिया जाता है। आप अपने स्तर पर उनको कहिए कि छुट्टी दे दे।
सभापति ने भी सुझाव दिया कि छुट्टी देने का अधिकार व्यवहारिक स्तर पर प्रधानाध्यापक को ही दिया जाना चाहिए, ताकि शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। । सभापति ने भी मंत्री को यह समझाया कि पुलिस में या आर्मी में यह होता है कि शादी विवाह के समय में भी छुट्टी नहीं दिया जाता है तो गोली चल जाता है।






