1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 11, 2026, 10:42:41 AM
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BIHAR NEWS : बिहार की राजनीति में पिछले करीब डेढ़ महीने से चल रहा सस्पेंस अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। सत्ता के गलियारों में चल रही अटकलों, बैठकों और रणनीतिक चालों के बाद अब तस्वीर लगभग साफ हो गई है। संकेत स्पष्ट हैं कि राज्य में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने जा रही है, जबकि महागठबंधन की उम्मीदों को फिलहाल बड़ा झटका लगा है।
दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत मार्च की शुरुआत में ही हो गई थी, जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने राज्यसभा जाने की अपनी इच्छा सार्वजनिक कर दी थी। 5 मार्च को जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने खुद बताया था कि वे अब तक लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं, लेकिन राज्यसभा का अनुभव उन्हें नहीं मिला है। यही कारण है कि वे अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं।
हालांकि उनके इस बयान के बाद भी बिहार की राजनीति में कयासों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा था। 30 मार्च को जब उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया, तब जाकर इन अटकलों पर कुछ हद तक विराम लगा। इसके बावजूद सियासी हलकों में ‘खेला’ की चर्चाएं जारी रहीं।
इस पूरे राजनीतिक ड्रामे में महागठबंधन की भूमिका भी काफी अहम रही। Tejashwi Yadav के नेतृत्व वाला गठबंधन इस उम्मीद में था कि एक बार फिर परिस्थितियां उनके पक्ष में पलट सकती हैं। इससे पहले भी दो मौकों पर वे अप्रत्याशित तरीके से सत्ता में आ चुके हैं। खासकर 2015 और 2022 के राजनीतिक समीकरणों ने उन्हें यह भरोसा दिया था कि नीतीश कुमार का रुख कभी भी बदल सकता है।
लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। महागठबंधन की तमाम उम्मीदों पर पानी फिर गया। अंदरखाने यह भी चर्चा रही कि विपक्ष ने जानबूझकर भ्रम की स्थिति बनाए रखी, ताकि एनडीए के भीतर असमंजस पैदा किया जा सके। हालांकि इसका कोई ठोस असर देखने को नहीं मिला।
दिलचस्प बात यह है कि भ्रम की इस राजनीति में जेडीयू के कुछ नेता भी पीछे नहीं रहे। कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से यह अपील की कि नीतीश कुमार बिहार की राजनीति न छोड़ें। वहीं विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा कि भाजपा ने उन्हें ‘हाईजैक’ कर लिया है। जेडीयू नेताओं ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि नीतीश कुमार छह महीने तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं, जिससे अटकलों को और हवा मिली।
इसी बीच एक और दिलचस्प मोड़ तब आया जब राजनीति में नए-नए सक्रिय हुए नीतीश कुमार के बेटे Nishant Kumar का नाम सामने आने लगा। जेडीयू के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें डिप्टी सीएम बनाने की मांग भी उठाई। हालांकि इस पर अभी तक अंतिम फैसला नहीं हो पाया है।
उधर, दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर चलता रहा। जेडीयू की ओर से Sanjay Kumar Jha और केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh पार्टी का पक्ष रखते रहे। माना जा रहा है कि इन बैठकों में नई सरकार के गठन का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, अब यह लगभग तय हो चुका है कि बिहार में नई सरकार एनडीए के नेतृत्व में ही बनेगी। सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि इस बार मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। वहीं गृह मंत्रालय भी भाजपा के पास ही रहेगा। मंत्रिमंडल के गठन को लेकर भी दोनों दलों के बीच सहमति बन चुकी है और किसी बड़े विवाद की संभावना नहीं दिख रही।
सिर्फ एक मुद्दा अभी बाकी है और वह है डिप्टी सीएम का चेहरा। जेडीयू अब तक यह तय नहीं कर पाया है कि निशांत कुमार को इस पद पर आगे बढ़ाया जाए या नहीं। हालांकि भाजपा की ओर से इस पर कोई आपत्ति नहीं बताई जा रही है, जिससे साफ है कि अंतिम फैसला पूरी तरह नीतीश कुमार पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आने वाला है। नीतीश कुमार अब राज्य की बजाय राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं, जबकि राज्य की कमान भाजपा के हाथों में जाने की पूरी संभावना है।
वहीं महागठबंधन के लिए यह समय आत्ममंथन का है। खासकर तेजस्वी यादव के लिए यह एक संकेत है कि उन्हें अपनी रणनीति पर दोबारा काम करना होगा और बिहार की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी। आने वाले 3-4 दिनों में जब नई सरकार का औपचारिक ऐलान होगा, तब यह साफ हो जाएगा कि बिहार की सत्ता का नया चेहरा कौन होगा और राज्य किस दिशा में आगे बढ़ेगा।