Bihar Bhumi: बिहार सरकार ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हटाने के लिए व्यापक प्रशासनिक अभियान शुरू कर दिया है। उच्चतम न्यायालय की सख्त टिप्पणी के बाद इस कार्रवाई में और तेजी लाई गई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ऐसे मामलों में शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जाएगी।
कैडेस्ट्रल सर्वे में दर्ज उन सरकारी जमीनों की पहचान की जा रही है, जिन पर विधिसम्मत बंदोबस्ती नहीं हुई है और जो फिलहाल निजी कब्जे में हैं। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ऐसी भूमि को चिह्नित कर विधिक प्रक्रिया के तहत वाद दायर कर उसे मुक्त कराया जाए।
एसएलपी (सी) संख्या 4337/2025, विनोद गांधी बनाम डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, मदुरई मामले में 22 जनवरी 2026 को उच्चतम न्यायालय ने अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि राज्यहित किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसके बाद मुख्य सचिव के निर्देश पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जिलों को त्वरित कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं।
प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिकता के आधार पर अवैध कब्जा हटाकर सरकारी भूमि को मुक्त कराया जाए और इसकी नियमित निगरानी व प्रगति रिपोर्ट सुनिश्चित की जाए। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकारी भूमि राज्य की अमूल्य संपत्ति है। इस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा न स्वीकार्य है और न सहनीय। अधिकारियों की लापरवाही से राज्यहित प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा और जवाबदेही तय की जाएगी।
सरकार की योजना अंचलवार सरकारी जमीन को सुरक्षित कर लैंड बैंक तैयार करने की है, ताकि औद्योगीकरण, आधारभूत संरचना विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध हो सके। इससे निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।
पिछले दो महीनों में भूमि सुरक्षा को लेकर कई परिपत्र जारी किए जा चुके हैं। अब जिला स्तर पर सख्त क्रियान्वयन शुरू हो गया है। साफ संकेत है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन कठोर और सक्रिय रुख अपनाएगा, ताकि विकास परियोजनाओं में कोई बाधा न आए।





