1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 10, 2026, 2:01:15 PM
- फ़ोटो
Bihar Education News : बिहार में सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और प्रखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) हर महीने एक निर्धारित दिन गांवों में पहुंचकर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों से सीधे संवाद करेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपस्थिति और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का जमीनी स्तर पर आकलन करना है।
शिक्षा विभाग इस व्यवस्था को संस्थागत रूप देने की तैयारी में जुटा है। विभाग का मानना है कि अभिभावकों से सीधे बातचीत करने से सरकारी स्कूलों की समस्याओं की वास्तविक जानकारी मिलेगी और उनका समाधान भी तेजी से किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत हर जिले में एक तय तारीख निर्धारित की जाएगी। उस दिन संबंधित जिले के जिला शिक्षा अधिकारी और प्रखंड शिक्षा अधिकारी पूरे दिन किसी एक गांव में मौजूद रहेंगे। वहां सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि वे बिना किसी झिझक के स्कूल से जुड़ी समस्याएं और सुझाव अधिकारियों के सामने रख सकें। इस दौरान अधिकारी यह जानने की कोशिश करेंगे कि विद्यालय में नियमित रूप से पढ़ाई हो रही है या नहीं, शिक्षक समय पर आते हैं या नहीं, बच्चों की पढ़ाई का स्तर कैसा है और स्कूल में उपलब्ध सुविधाएं संतोषजनक हैं या नहीं।
अभिभावकों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे। इस रिपोर्ट में प्रत्येक विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता, छात्रों की उपस्थिति और अन्य आवश्यक सुविधाओं का उल्लेख होगा।
इसके बाद संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षा कर्मियों के साथ बैठक कर सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए जाएंगे। केवल निर्देश जारी करने तक ही यह प्रक्रिया सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कुछ समय बाद उसी गांव के अभिभावकों से दोबारा संपर्क कर यह भी पता लगाया जाएगा कि स्कूल की स्थिति में वास्तव में सुधार हुआ है या नहीं।
शिक्षा विभाग ने इस अभियान की नियमित मॉनिटरिंग की भी योजना बनाई है। प्रत्येक जिले से मुख्यालय को यह जानकारी भेजी जाएगी कि महीने के दौरान कितने गांवों में अधिकारियों ने अभिभावकों से संवाद किया। इसके साथ ही संबंधित विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या, स्वीकृत और कार्यरत शिक्षकों की संख्या, भवन, शौचालय, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति की भी रिपोर्ट तैयार कर भेजी जाएगी। इन आंकड़ों के आधार पर राज्य स्तर पर शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा होगी और जहां आवश्यकता होगी, वहां अतिरिक्त शिक्षक, संसाधन या अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग के इस फैसले के पीछे हाल ही में आयोजित सहयोग शिविरों से मिली शिकायतें अहम कारण बनी हैं। इन शिविरों में बड़ी संख्या में अभिभावकों और ग्रामीणों ने सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी, शिक्षकों की अनियमित उपस्थिति, कमजोर पठन-पाठन व्यवस्था और कई स्कूल भवनों की खराब स्थिति जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया था।
विभाग का मानना है कि केवल कार्यालयों में बैठकर समीक्षा करने के बजाय यदि अधिकारी गांवों में जाकर अभिभावकों से सीधे संवाद करेंगे, तो समस्याओं की सही तस्वीर सामने आएगी और समाधान भी अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
नई पहल के जरिए शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों और अभिभावकों के बीच संवाद को मजबूत करना चाहता है। अधिकारियों का मानना है कि अभिभावकों की नियमित भागीदारी से विद्यालयों की जवाबदेही बढ़ेगी, शिक्षकों की कार्यशैली में सुधार आएगा और बच्चों की पढ़ाई पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और जमीनी स्तर पर समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।