Bihar Co: बिहार भर के अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारी आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. सभी सीओ-आरओ फरवरी 2026 में भी हड़ताल पर गए थे, हालांकि सरकार से वार्ता के बाद सभी राजस्व पदाधिकारी काम पर लौट गए थे. आज 9 मार्च से हड़ताल पर जाने के निर्णय के बाद सरकार सख्त होते दिख रही है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने साफ कहा है कि सरकारी सेवकों का हड़ताल मौलिक अधिकार नहीं है. विभाग के प्रधान सचिव ने आज शाम तक हड़ताली अधिकारियों की पूरी सूची मांगी है, ताकि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की जा सके.
सभी अंचलाधिकारियों से सरकारी सामान वापस लें.....
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने सभी समाहर्ताओं को पत्र लिखा है. जिसमें आज 9 मार्च से राजस्व अधिकारियों द्वारा प्रस्तावित सामूहिक हड़ताल पर जाने के आलोक में वैकल्पिक व्यवस्था का आदेश दिया गया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट किया है कि राजस्व अधिकारियों का हड़ताल प्रतिबंधित है . विभाग के प्रधान सचिव ने स्पष्ट किया है कि सामूहिक अवकाश पर जाने के आलोक में 2 फरवरी 2026 को जो व्यवस्था बनाई गई थी,उसे लागू करें. हड़ताल पर जाने वाले पदाधिकारी से सभी सरकारी सामान ले लें.
सुप्रीम कोर्ट का है नियमन.....
विभाग ने स्पष्ट किया है कि राजस्व अधिकारी हड़ताल पर जाने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन कोर्ट का स्पष्ट मानना है कि हड़ताल उनका फंडामेंटल राइट नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में नियमन दिया है. संविधान के अनुच्छेद 141 के अनुसार हड़ताल नन नेगोशिएबल है. बिहार सरकारी सेवक अचार नियमावली के तहत भी सरकारी सेवकों का प्रदर्शन एवं हड़ताल प्रतिबंधित है .
आज शाम तक मांगी गई अंचलाधिकारियों की सूची
सी.के. अनिल ने आगे कहा है कि जनगणना पदाधिकारी अपने कर्तव्य का पालन करने से मना नहीं कर सकते हैं, ना ही उसकी उपेक्षा कर सकते हैं. जनगणना कार्य से इनकार करना कार्य में लापरवाही है जो दंडनीय है. मुख्य सचिव का स्पष्ट आदेश है की प्रति सोमवार एवं शुक्रवार को सात निश्चय तीन के तहत आम जनता से मिलना है . ऐसे में आज शाम 6:00 बजे तक सभी अनुपस्थित, हड़ताल पर गए अंचल अधिकारी-राजस्व अधिकारियों की सूची मुख्यालय को भेजें, ताकि वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में जानबूझकर सरकारी कार्य में सुनियोजित तरीके से अवरोध पैदा करने वाले राजस्व पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सके.





