Bihar circle rate : बिहार में नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले आम जनता को बड़ा झटका लग सकता है। राज्य में फ्लैट और जमीन की खरीद-बिक्री पर निबंधन दर यानी सर्किल रेट में भारी बढ़ोतरी की तैयारी चल रही है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद लोगों को जमीन की रजिस्ट्री के लिए मौजूदा दर की तुलना में तीन से चार गुना तक अधिक राशि चुकानी पड़ सकती है।
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने जिला मूल्यांकन समितियों से प्राप्त अनुशंसाओं के आधार पर एमवीआर (मिनिमम वैल्यू रजिस्टर) में संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेज दिया है। सरकार की मंजूरी मिलते ही नई दरें लागू कर दी जाएंगी। इस बदलाव से पहले ही रियल एस्टेट बाजार में हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, जिलों में डीएम की अध्यक्षता में गठित मूल्यांकन समितियों ने वर्तमान सर्किल रेट की गहन समीक्षा की है। निबंधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2013 के बाद और शहरी क्षेत्रों में वर्ष 2016 के बाद एमवीआर में कोई बड़ा संशोधन नहीं हुआ है। इस दौरान जमीन की बाजार कीमतों में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। बाजार मूल्य और सरकारी दर के बीच बढ़ते अंतर को संतुलित करने के लिए ही यह संशोधन प्रस्तावित किया गया है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यदि नया सर्किल रेट लागू होता है तो राज्य सरकार को स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क से राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। हालांकि, इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें जमीन और फ्लैट खरीदने के लिए अधिक खर्च करना होगा।
वहीं, विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि नया सर्किल रेट एक अप्रैल से लागू होना मुश्किल दिख रहा है। कारण यह है कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इन दिनों अन्य राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए प्रेक्षक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जिससे प्रक्रिया में थोड़ी देरी संभव है।
इधर, आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए निबंधन विभाग ने विशेष व्यवस्था की है। जनवरी से ही रविवार के दिन भी निबंधन कार्यालय खोले जा रहे हैं ताकि लोगों को रजिस्ट्री में किसी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा 29 मार्च को रविवार और 31 मार्च को महावीर जयंती होने के बावजूद अगले तीन दिनों तक सभी निबंधन कार्यालय सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे और भूमि एवं फ्लैट की रजिस्ट्री का कार्य सुचारू रूप से जारी रहेगा।कुल मिलाकर, सर्किल रेट में प्रस्तावित बढ़ोतरी से जहां सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी, वहीं आम लोगों पर जमीन और घर खरीदना और भी महंगा हो सकता है।






