1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 17, 2026, 8:52:30 AM
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Bihar 5G Network : देश में 5जी नेटवर्क सेवाओं का विस्तार लगातार तेज हो रहा है और इस दौड़ में बिहार ने कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। जिस बिहार को लंबे समय तक विकास के पैमानों पर पिछड़ा माना जाता रहा, वही अब डिजिटल कनेक्टिविटी के मामले में नई मिसाल बनता दिख रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार बिहार की 94.52 प्रतिशत आबादी अब 5जी नेटवर्क की पहुंच में आ चुकी है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत 86.18 प्रतिशत से काफी अधिक है। इतना ही नहीं, देश के आईटी हब माने जाने वाले कर्नाटक में 5जी कवरेज केवल 79.92 प्रतिशत है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह 85.25 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है।
दिलचस्प बात यह है कि बेंगलुरु जैसे बड़े टेक शहर और वैश्विक आईटी कंपनियों के दफ्तर होने के बावजूद कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में अब भी 5जी नेटवर्क का विस्तार सीमित है। वहीं बिहार में गांवों तक इंटरनेट पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया, जिसका असर अब साफ दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार की सफलता के पीछे सरकार और टेलीकॉम कंपनियों की संयुक्त रणनीति बड़ी वजह रही। राज्य में केवल शहरों पर फोकस करने के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार को प्राथमिकता दी गई। गांव-गांव तक इंटरनेट पहुंचाने के लिए केन्द्र सरकार की भारत नेट परियोजना ने भी अहम भूमिका निभाई। इस योजना के तहत बिहार की करीब 8,860 ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ा गया। इस परियोजना पर 812 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए।
भारत नेट योजना का उद्देश्य ग्रामीण भारत को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ना था और बिहार ने इस दिशा में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। इसका नतीजा यह हुआ कि अब दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोग भी ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल बैंकिंग, वीडियो कॉलिंग और हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।
आज विश्व दूरसंचार दिवस के मौके पर यह उपलब्धि और भी खास मानी जा रही है। यह दिवस पहली बार वर्ष 1969 में मनाया गया था। इसे 1865 में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की स्थापना की याद में शुरू किया गया था। इस दिन का उद्देश्य लोगों को दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी के महत्व के प्रति जागरूक करना है। साथ ही डिजिटल विभाजन को खत्म कर दुनिया को तकनीक के जरिए जोड़ने का संदेश देना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।
हालांकि बिहार में 5जी विस्तार की तस्वीर पूरी तरह संतोषजनक नहीं कही जा सकती। राज्य के कई हिस्सों में अब भी नेटवर्क की गंभीर समस्या बनी हुई है। खासकर राष्ट्रीय राजमार्गों और सीमावर्ती ग्रामीण इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी कमजोर है। रिपोर्ट के अनुसार बिहार के राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग 1750 किलोमीटर क्षेत्र में 424 ऐसे स्थान हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इसकी सबसे बड़ी वजह मोबाइल टावरों के बीच अधिक दूरी होना है। दूरसंचार मानकों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में टावरों की दूरी 500 से 800 मीटर के बीच होनी चाहिए, लेकिन कई इलाकों में यह दूरी 1.5 से 2 किलोमीटर तक पहुंच जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो यह फासला 3 से 5 किलोमीटर और कुछ जगहों पर 7 से 8 किलोमीटर तक है। यही कारण है कि कॉल ड्रॉप और इंटरनेट स्पीड की समस्या अब भी बनी हुई है।
ट्राई द्वारा जनवरी में समस्तीपुर जिले में कराए गए इंडिपेंडेंट ड्राइव टेस्ट में भी कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक बीएसएनएल की स्थिति सबसे कमजोर रही। बीएसएनएल नेटवर्क से केवल 36.89 प्रतिशत कॉल ही सफलतापूर्वक लग पाईं, जबकि 10.04 प्रतिशत कॉल ड्रॉप हो गईं। दूसरी ओर एयरटेल और जियो ने 99 प्रतिशत से अधिक कॉल सफलता दर दर्ज की। इंटरनेट स्पीड में भी बड़ा अंतर देखने को मिला। जियो की डाउनलोड स्पीड 158 एमबीपीएस और एयरटेल की 101 एमबीपीएस रही, जबकि बीएसएनएल केवल 12 एमबीपीएस की स्पीड दे पाया।
ट्राई की रिपोर्ट में सीवान, रोहतास, कैमूर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और सीमावर्ती इलाकों में नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत बताई गई है। इसके बावजूद बिहार का तेजी से बढ़ता 5जी नेटवर्क यह संकेत दे रहा है कि राज्य अब डिजिटल क्रांति के नए दौर में तेजी से आगे बढ़ रहा है।