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Bihar News: बिहार के 18 जिलों में खुलेंगे नए केंद्रीय विद्यालय, छात्रों की हुई बल्ले-बल्ले; स्मार्ट क्लास और बाल वाटिका की मिलेगी सुविधा

बिहार के छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने राज्य के 18 जिलों में नए केंद्रीय विद्यालय खोलने को मंजूरी दे दी है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लास, आधुनिक लैब, कंप्यूटर सुविधा और बाल वाटिका जैसी नई व्यवस्थाएं होंगी, जिससे छात्रों को बेहतर शिक

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 01, 2026, 12:31:00 PM

Bihar News: बिहार के 18 जिलों में खुलेंगे नए केंद्रीय विद्यालय, छात्रों की हुई बल्ले-बल्ले; स्मार्ट क्लास और बाल वाटिका की मिलेगी सुविधा

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Bihar News : बिहार के छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य में स्कूली शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने बिहार के 18 जिलों में नए केंद्रीय विद्यालय (Kendriya Vidyalaya) खोलने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से हजारों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा का लाभ मिलेगा। इन विद्यालयों में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ पढ़ाई होगी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत नई व्यवस्थाएं भी लागू की जाएंगी।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि नए केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना के लिए आवश्यक जमीन बिहार सरकार उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस योजना को प्राथमिकता के आधार पर लागू कर रही है ताकि जल्द से जल्द विद्यालयों का निर्माण शुरू हो सके।


12 जिलों में जमीन उपलब्ध, 6 जिलों में जल्द होगी व्यवस्था

मंत्री ने बताया कि 18 जिलों में से 12 जिलों में केंद्रीय विद्यालयों के लिए भूमि पहले ही उपलब्ध करा दी गई है, जबकि शेष 6 जिलों में अगले कुछ महीनों के भीतर जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी। उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने जिलों में उपयुक्त सरकारी भूमि की पहचान कर उसे जल्द से जल्द शिक्षा विभाग या केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) को हस्तांतरित करें। सरकार का लक्ष्य है कि भूमि संबंधी प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि छात्रों को जल्द इन विद्यालयों का लाभ मिल सके।


आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे नए केंद्रीय विद्यालय

सरकार के अनुसार नए केंद्रीय विद्यालयों को आधुनिक शिक्षा की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं, कंप्यूटर लैब, डिजिटल लर्निंग सिस्टम और अन्य आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन सुविधाओं का उद्देश्य छात्रों को केवल सैद्धांतिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें प्रायोगिक ज्ञान भी देना है। डिजिटल तकनीक आधारित शिक्षा से विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा।


पहली बार शुरू होंगी बाल वाटिकाएं

इन नए केंद्रीय विद्यालयों की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इनमें बाल वाटिका (तीन वर्ष का पूर्व-प्राथमिक चरण) भी शुरू किया जाएगा। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत पहली बार लागू की जा रही है।इससे छोटे बच्चों को शुरुआती स्तर से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलेगा और उनकी बुनियादी सीखने की क्षमता को बेहतर बनाया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने से आगे की पढ़ाई में बच्चों का प्रदर्शन बेहतर होता है।


2025 में मिली थी 19 केंद्रीय विद्यालयों की मंजूरी

गौरतलब है कि साल 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देशभर में 57 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने को मंजूरी दी थी। उस समय बिहार के लिए 19 केंद्रीय विद्यालयों को स्वीकृति मिली थी। अब राज्य सरकार जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर रही है ताकि इन विद्यालयों का निर्माण समय पर पूरा हो सके। राज्य सरकार का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में यह पहल बिहार के विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देगी और उन्हें राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा अपने ही जिले में उपलब्ध होगी।


देशभर में संचालित हैं 1288 केंद्रीय विद्यालय

वर्तमान में देशभर में 1,288 केंद्रीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें तीन विद्यालय विदेशों—मॉस्को, काठमांडू और तेहरान—में स्थित हैं। 30 जून 2025 तक इन विद्यालयों में करीब 13.62 लाख विद्यार्थी अध्ययन कर रहे थे।सरकार के अनुसार दिसंबर 2024 में जिन नए विद्यालयों को मंजूरी दी गई थी, उनमें प्रत्येक विद्यालय की क्षमता 1,520 विद्यार्थियों की होगी। इस हिसाब से कुल 86,640 छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सीधा लाभ मिलेगा।


बिहार के छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा

18 नए केंद्रीय विद्यालय शुरू होने से बिहार के हजारों विद्यार्थियों को अपने जिले के करीब ही केंद्रीय विद्यालय जैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी। इससे अभिभावकों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। आधुनिक सुविधाओं, प्रशिक्षित शिक्षकों और नई शिक्षा नीति के अनुरूप पढ़ाई के जरिए राज्य के शिक्षा स्तर को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।