NEET Student Case : पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच की रफ्तार बढ़ा दी है। एजेंसी फिलहाल जांच के प्रारंभिक चरण में है, लेकिन अब पूरा जोर फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों की गहन पड़ताल पर दिया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शुरुआती स्तर पर कहीं कोई चूक, लापरवाही या साक्ष्य संग्रह में त्रुटि तो नहीं हुई।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई अब फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) द्वारा जुटाए गए सभी साक्ष्यों का क्रॉस-चेक कर रही है। एजेंसी उन सभी एफएसएल अधिकारियों और कर्मियों की सूची तैयार कर रही है, जिन्होंने घटनास्थल से सबूत एकत्रित किए थे या बाद में उनकी जांच की थी। सीबीआई इन अधिकारियों से दो चरणों में पूछताछ करेगी। पहले चरण में साक्ष्य संग्रह की प्रक्रिया और मौके की स्थिति को लेकर सवाल-जवाब होंगे, जबकि दूसरे चरण में लैब में की गई जांच और रिपोर्ट की तकनीकी समीक्षा की जाएगी।
मामले में डिजिटल एंगल को भी बेहद अहम माना जा रहा है। छात्रा के मोबाइल फोन, लैपटॉप, कॉल डिटेल्स, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जुड़े डेटा की फिर से जांच की जा सकती है। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले छात्रा के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और क्या किसी प्रकार का मानसिक दबाव या धमकी का संकेत डिजिटल रिकॉर्ड में मौजूद है।
इसी कड़ी में हाल ही में सीबीआई की पांच सदस्यीय टीम, जिसमें एक महिला इंस्पेक्टर भी शामिल थीं, तीसरी बार जहानाबाद जिले के मखदुमपुर थाना क्षेत्र स्थित छात्रा के मामा के गांव पहुंची। टीम ने परिजनों से कई घंटे तक गहन पूछताछ की। इससे पहले 17 फरवरी को भी सीबीआई की टीम गांव पहुंचकर छात्रा के माता-पिता, भाई, भाभी, दादी और फुआ से विस्तृत जानकारी ले चुकी थी। एजेंसी परिवार के बयान को तकनीकी साक्ष्यों के साथ मिलान कर रही है, ताकि घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके।
परिजनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने घर पर चौबीसों घंटे दो पुलिसकर्मियों की तैनाती की है। अधिकारियों का कहना है कि परिवार की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी अप्रिय घटना या संभावित दबाव को रोकने के लिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत घर में चार सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं, जो आसपास की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रहे हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि यदि किसी प्रकार की धमकी या संदिग्ध गतिविधि होती है, तो उसके प्रमाण कैमरों में दर्ज हो सकेंगे और संबंधित लोगों तक पहुंचना आसान होगा।
सीबीआई की रणनीति साफ है—मामले के हर पहलू की तकनीकी और वैज्ञानिक आधार पर जांच। एजेंसी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी साक्ष्यों की दोबारा जांच और स्वतंत्र विश्लेषण कराना चाहती है। यदि आवश्यकता पड़ी तो फॉरेंसिक साक्ष्यों को किसी अन्य स्वतंत्र लैब से भी सत्यापित कराया जा सकता है।
फिलहाल पूरा मामला संवेदनशील बना हुआ है और परिजन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी और किसी भी पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में एफएसएल रिपोर्ट और डिजिटल विश्लेषण इस मामले में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।





