1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 01, 2026, 12:49:40 PM
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Pintu Yadav Murder Case: पश्चिम चंपारण के रामनगर थाना क्षेत्र के चर्चित पिंटू यादव हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. नाली विवाद से शुरू हुए इस मामले में मां और उसके दो बेटों को दोषी करार देते हुए कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. मामले में सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान को अदालत ने अहम साक्ष्य माना.
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद यह फैसला सुनाया. दोषी पाए गए तीनों आरोपियों को अब न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. बताया जा रहा है कि घटना के करीब दो साल के अंदर कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाया है.
घटना रामनगर थाना क्षेत्र के मुड़िला गांव की है. अभियोजन के अनुसार 26 दिसंबर 2024 की सुबह करीब साढ़े आठ बजे नाली के पानी को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ था. देखते ही देखते कहासुनी मारपीट में बदल गई.
बताया गया कि इसी दौरान मुकेंद्र यादव मौके पर पहुंचे तो उन्होंने कुछ लोगों को अपने परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट करते देखा. इस घटना में ननक यादव, पिंटू यादव, निशा कुमारी और मुन्नी देवी घायल हो गए थे.
इलाज के दौरान हुई थी पिंटू यादव की मौत
मारपीट में गंभीर रूप से घायल पिंटू यादव को परिजन इलाज के लिए रामनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था. इसके बाद मृतक पक्ष की ओर से रामनगर थाना में मामला दर्ज कराया गया था.
प्राथमिकी में गोलू कुमार यादव, अनिता देवी और कीर्ति यादव को आरोपी बनाया गया था. आरोप था कि मारपीट के दौरान पिंटू यादव पर गंभीर हमला किया गया, जिसके कारण उनकी मौत हुई.
अस्पताल में भी हुआ था विवाद
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि घटना के बाद अस्पताल परिसर में भी मृतक के परिजनों के साथ मारपीट की कोशिश की गई थी. हालांकि वहां मौजूद लोगों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को संभाल लिया गया था.
वहीं बचाव पक्ष ने अदालत में कई तर्क रखे. बचाव पक्ष की ओर से प्राथमिकी में देरी, घटनास्थल से पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने और कुछ गवाहों के बयानों में अंतर का हवाला दिया गया.
लेकिन अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, दस्तावेजी साक्ष्य और रामनगर अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज को कोर्ट के सामने रखा. अदालत ने इन साक्ष्यों को महत्वपूर्ण मानते हुए तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया.