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आंधी और ओलावृष्टि ने बरपाया कहर, गेहूं की तैयार फसल बर्बाद, मुआवजे की उठी मांग

मुजफ्फरपुर और खगड़िया में तेज आंधी और ओलावृष्टि से गेहूं, आम और लीची की फसल को भारी नुकसान हुआ है। कई क्षेत्रों में किसानों ने फसल बर्बादी के बाद सरकार से मुआवजे की मांग की है।

बिहार न्यूज
किसानों की बढ़ी परेशानी
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
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MUZAFFARPUR/ KHAGARIA: मुजफ्फरपुर और खगड़िया जिले में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। तेज आंधी और झमाझम बारिश के साथ हुई भीषण ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी और कटनी के लिए तैयार गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। जिले के गायघाट और कटरा प्रखंड सहित कई अन्य क्षेत्रों में कुदरत का ऐसा कहर बरपा कि किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया। गेहूं के साथ-साथ आम और लीची की फसलों को भी व्यापक क्षति हुई है, जिससे किसान अब दाने-दाने को मोहताज होने की स्थिति में हैं।


गायघाट और कटरा में सबसे अधिक तबाही: जिले के गायघाट प्रखंड की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। यहाँ के शिवदहा, बेरुआ, जारंग पूर्वी, जारंग पश्चिमी, लोमा, कमरथू और बोआरीडीह जैसी पंचायतों में जबरदस्त ओलावृष्टि हुई है। खेतों में बिछी गेहूं की बालियां देख किसानों की आंखों में आंसू हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि फसल पूरी तरह तैयार थी और कुछ ही दिनों में कटनी शुरू होने वाली थी, लेकिन कुदरत की मार ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया।


कर्ज के बोझ तले दबे किसान:

शिवदहा के युवा समाजसेवी संतोष यादव, पंचायत समिति पति विजय कुमार राय और पूर्व पंचायत समिति रमन कुमार उपाध्याय समेत दर्जनों किसानों ने अपना दुख साझा करते हुए बताया कि उन्होंने साहूकारों और बैंकों से कर्ज लेकर खाद, बीज और सिंचाई का प्रबंध किया था। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार अच्छी पैदावार होगी जिससे वे अपना कर्ज चुका पाएंगे, लेकिन अब फसल बर्बाद होने से उनके सामने परिवार के भरण-पोषण और कर्ज की अदायगी की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।


आम और लीची पर भी पड़ा बुरा असर: विजय कुमार राय ने बताया कि ओलावृष्टि का असर केवल गेहूं तक सीमित नहीं है। मुजफ्फरपुर की शान मानी जाने वाली लीची और आम के मंजरों को भी भारी क्षति पहुंची है। तेज आंधी और ओलों की वजह से मंजर झड़ गए हैं, जिससे इस साल फलों के उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका है। फल उत्पादकों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द सुध नहीं ली, तो वे पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।


मुआवजे की मांग

प्रभावित क्षेत्रों के किसानों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से अविलंब नुकसान का आकलन कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि कृषि विभाग की टीम को पंचायतों में भेजकर क्षति का भौतिक सत्यापन कराया जाए और उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। संतोष यादव ने कहा कि किसान पहले ही महंगाई और खेती की बढ़ती लागत से परेशान हैं, ऐसे में यह प्राकृतिक आपदा उनके लिए किसी दोहरी मार से कम नहीं है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें समय पर आर्थिक सहायता नहीं मिली, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल, आसमान में छाये बादल और रुक-रुक कर हो रही बारिश ने किसानों की धड़कनें बढ़ा रखी हैं।


वही खगड़िया जिले में भी शुक्रवार की रात तेज आंधी बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़कर रख दिया है। खेतों में लहलहाते गेहूं, मकई, तेलहन और दलहन की फसलें बर्बाद हो गयी है। फसलें खेतों में दूर-दूर तक गिरे दिखाई दे रहे हैं। गेंहू फसल की बलिया भी खेतों में गिर गये हैं। जिले के सातों प्रखंडों में खेतों में लगी रबी फसलों का कमोवेश यही हाल है। किसानों का कहना है कि वे सूद पर पैसा लेकर खेती किए, लेकिन आंधी और ओलावृष्टि ने उनके 80 प्रतिशत फसलों को क्षतिग्रस्त कर दिया। बेमौसम आंधी और बारिश से उन्हें भारी नुकसान हुआ है। अन्नदाता खून के आंसू रोने को मजबूर हैं और सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

मुजफ्फरपुर से मनोज और खगड़िया से अनिश की रिपोर्ट

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रिपोर्टर / लेखक

Jitendra Vidyarthi

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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