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बिहार में साइबर क्राइम का बड़ा खुलासा: विदेशी नेटवर्क से जुड़ा डेटा तस्करी गिरोह बेनकाब, 4 मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Bihar News: मुजफ्फरपुर पुलिस और बिहार एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में एक अंतरराष्ट्रीय डेटा तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। इस हाई-टेक साइबर सिंडिकेट के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जो भारतीय नागरिकों का संवेदनशील डेटा विदेशी अपराधियों...

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 22, 2026, 1:47:39 PM

बिहार में साइबर क्राइम का बड़ा खुलासा: विदेशी नेटवर्क से जुड़ा डेटा तस्करी गिरोह बेनकाब, 4 मास्टरमाइंड गिरफ्तार

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Bihar News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय एक हाई-टेक साइबर डेटा तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह आम नागरिकों की निजी और संवेदनशील जानकारी चोरी कर विदेशी अपराधियों को बेच रहा था। इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने उत्तर प्रदेश और बिहार के अलग-अलग इलाकों से चार शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।


इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत 21 अप्रैल 2026 को केंद्रीय एजेंसी से मिली एक गुप्त सूचना के बाद हुई। जानकारी के अनुसार, अहियापुर थाना क्षेत्र का रहने वाला रिषभ कुमार अपने घर से ही अवैध डेटा एक्सचेंज का संचालन कर रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें साइबर थाना, जिला आसूचना इकाई (DIU) और बिहार एसटीएफ के अधिकारी शामिल किए गए।


सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी और साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापेमारी कर मुख्य आरोपी रिषभ कुमार को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने उसके तीन अन्य साथियों, दीपक चौधरी उर्फ आशु कुमार (गाजीपुर, यूपी), सुधांशु कुमार (दरभंगा) और साहिल कुमार (मुजफ्फरपुर) को भी धर दबोचा। इसके अलावा गिरोह के तीन अन्य सदस्यों की पहचान भी कर ली गई है, जिनकी तलाश जारी है।


जांच में सामने आया कि यह गिरोह अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर डेटा चोरी करता था। आरोपी ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टूल्स, फर्जी सिम कार्ड और टेलीग्राम बॉट्स के जरिए लोगों की निजी जानकारी जुटाते थे। इतना ही नहीं, ये लोग फर्जी एपीआई तैयार कर सरकारी और निजी डेटाबेस में अनधिकृत तरीके से घुसपैठ करते थे।


पुलिस द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोन और आईपैड की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी मोबाइल नंबर, आईएमईआई डिटेल्स, आधार और पैन कार्ड की जानकारी, वाहन रजिस्ट्रेशन डेटा और बैंक खातों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी चोरी कर रहे थे। इसके बाद इस डेटा को बांग्लादेश समेत अन्य देशों के साइबर अपराधियों को ऊंची कीमत पर बेचा जाता था। लेन-देन के लिए क्रिप्टो करेंसी और फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था।


पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों में जमा करीब 4 लाख रुपये को फ्रीज कर दिया है। साथ ही बरामद सभी डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि इस नेटवर्क की पूरी गहराई तक पहुंचा जा सके।


एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने बताया कि आरोपियों के मोबाइल से विदेशी अपराधियों के साथ बातचीत के पुख्ता सबूत मिले हैं। शुरुआती जांच में बांग्लादेशी साइबर गिरोह से इनके कनेक्शन की पुष्टि हुई है। यह पूरा नेटवर्क एन्क्रिप्टेड टेलीग्राम चैनलों के जरिए संचालित किया जा रहा था, जिससे सुरक्षा एजेंसियों से बचा जा सके।


इस मामले में अब केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा भी पूछताछ की तैयारी की जा रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले इस नेटवर्क का पूरी तरह से भंडाफोड़ किया जा सके।


पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपनी निजी जानकारी जैसे आधार नंबर, ओटीपी, बैंक डिटेल्स या अन्य संवेदनशील डेटा किसी के साथ साझा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, क्योंकि छोटी सी लापरवाही भी बड़े साइबर अपराध का कारण बन सकती है।