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नीतीश के शराबबंदी दावे पर सवाल: कटिहार में खुलेआम धधक रही महुआ की अवैध भट्ठियां

कटिहार जिले के आजमनगर थाना क्षेत्र में सीमा के पास महुआ शराब की अवैध भट्ठियां धधक रही हैं। पुलिस केवल राह चलते शराबियों को पकड़ रही है, जिससे नीतीश कुमार की शराबबंदी की साख पर सवाल उठ रहे हैं।

बिहार न्यूज
नीतीश की शराबबंदी पर सवाल
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
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KATIHAR: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 1 अप्रैल 2016 को प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी, जिसका उद्धेश्य समाज को नशामुक्त करना था, लेकिन यह कानून सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया। कटिहार जिले की यह तस्वीर इस कानून के सच को बयां करने के लिए काफी है। 


आजमनगर थाना क्षेत्र में इस कानून का सरेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। शराबबंदी के 9 साल बाद भी बंगाल सीमा से सटे गांवों में अवैध शराब का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। यह तस्वीर देवगांव पंचायत के वाजितपुर गांव का है, जहां धधकती भट्ठियों पर महुआ शराब तैयार की जा रही है। 


चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं, जो अवैध शराब को घर-घर तक पहुँचाती हैं। आजमनगर थाना क्षेत्र की कुछ प्रमुख पंचायतें अरिहापुर, बघौरा, जोकड़, खरसौता, शीतलपुर और शितलमनीजहां यह अवैध धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


 स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस केवल राह चलते शराबियों को पकड़ती है लेकिन चल रहे अवैध शराब निर्माण के भट्ठे को ध्वस्त करने की कोशिश नहीं करती। धधकती भट्ठियों के बीच पुलिस का अनजान बने रहना शराबबंदी कानून की साख पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।  


स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि अगर समय रहते सीमावर्ती इलाकों में अवैध शराब निर्माण और बिक्री पर ठोस कार्रवाई नहीं की गयी तो शराबबंदी केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगी और इस कानून को लागू करने का उद्धेश्य फेल हो जाएगा। सरकार और पुलिस को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। यही कारण है कि लोग लगातार शराबबंदी पर सवाल उठा रहे है और शराबबंदी समीक्षा की मांग कर रहे हैं। सरकार में बने लोग भी यही मांग कर रहे हैं। 

कटिहार से सोनू चौधरी की रिपोर्ट

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Jitendra Vidyarthi

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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