1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 18, 2026, 11:00:21 AM
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Bihar News: बिहार में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी इन दावों से काफी दूर नजर आती है। जमुई जिले से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था की पोल खोल दी है। यहां बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर जर्जर भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी सबकुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं।
मामला जमुई नगर परिषद क्षेत्र के कल्याणपुर मोहल्ले स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय कल्याणपुर का है। हैरानी की बात यह है कि यह स्कूल जिला मुख्यालय से महज कुछ दूरी पर स्थित है। जिलाधिकारी कार्यालय, जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय और कई अन्य प्रशासनिक दफ्तर भी स्कूल से ज्यादा दूर नहीं हैं। इसके बावजूद विद्यालय की हालत इतनी खराब है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा तक खतरे में पड़ गई है।
जानकारी के अनुसार विद्यालय में करीब ढाई सौ छात्र-छात्राओं का नामांकन है, जबकि यहां 6 से 7 शिक्षक कार्यरत हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल परिसर में कुल आठ क्लासरूम बनाए गए हैं, लेकिन इनमें से पांच कमरे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। कई कमरों की छत से प्लास्टर टूटकर गिर रहा है, तो कहीं दीवारों में दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। बरसात के मौसम में स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, क्योंकि कमरों में पानी टपकने लगता है और बच्चे डर के साए में पढ़ाई करने को मजबूर हो जाते हैं।
स्कूल के बच्चों का कहना है कि कई बार पढ़ाई के दौरान छत से मलबा गिर चुका है। इसके बावजूद मजबूरी में उन्हें उन्हीं कमरों में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता आर्थिक रूप से कमजोर हैं और वे निजी स्कूलों में पढ़ाई कराने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में सरकारी स्कूल ही उनका एकमात्र सहारा है, लेकिन यहां भी सुरक्षित माहौल नहीं मिल पा रहा है।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक संजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि जर्जर भवन को लेकर कई बार विभाग को लिखित सूचना दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि स्कूल भवन की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रधानाध्यापक ने बताया कि शिक्षक और छात्र दोनों भय के माहौल में पढ़ाई और शिक्षण कार्य करने को विवश हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब जिला मुख्यालय के बीच स्थित स्कूल की यह हालत है, तो गांव और दूरदराज के स्कूलों की स्थिति कैसी होगी, इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकार एक ओर स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई की बातें करती है, वहीं दूसरी ओर बच्चे टूटती छतों के नीचे बैठने को मजबूर हैं।
मामले को लेकर जब जिला शिक्षा पदाधिकारी दयाशंकर से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और संबंधित विभाग को लिखा जाएगा। हालांकि यह बयान भी कई सवाल खड़े कर रहा है, क्योंकि स्कूल प्रशासन की ओर से पहले ही कई बार लिखित शिकायत भेजे जाने की बात कही जा चुकी है। इतना ही नहीं, बाद में संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा।