Sanjeev Hans IAS : केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 1997 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी संजीव हंस सहित आठ लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। यह मामला उस समय का है जब संजीव हंस भारत सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री के निजी सचिव के रूप में कार्यरत थे।
सीबीआई के अनुसार, संजीव हंस पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी कंपनियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) से अनुकूल आदेश दिलाने के बदले रिश्वत की मांग की और उसे स्वीकार भी किया। इस मामले में मेसर्स आरएनए कॉर्पोरेशन के कर्मचारी विपुल बंसल, कंपनी के प्रमोटर अनुभव अग्रवाल, पुष्पराज बजाज, शादाब खान, देवेंद्र सिंह आनंद, मुकुल बंसल और मेसर्स ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स, मुंबई समेत अन्य को भी आरोपी बनाया गया है।
जांच की जिम्मेदारी सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच-III, नई दिल्ली के पुलिस निरीक्षक अमन राणा को सौंपी गई है। एजेंसी के मुताबिक, यह पूरा मामला बिल्डर-खरीदार विवाद से जुड़ा है, जिसमें ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स के पक्ष में फैसला दिलाने के लिए अवैध तरीके अपनाए गए।
एफआईआर के अनुसार, विपुल बंसल ने इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उसने संजीव हंस और आरएनए ग्रुप के प्रमोटर अनुभव अग्रवाल के बीच बैठक करवाई। इस बैठक में कथित तौर पर यह सहमति बनी कि एनसीडीआरसी से अनुकूल आदेश प्राप्त करने के लिए संजीव हंस को एक करोड़ रुपये की रिश्वत दी जाएगी।
सीबीआई का दावा है कि बैठक के बाद संजीव हंस ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए एनसीडीआरसी की बेंच से ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स के पक्ष में दो अलग-अलग तारीखों पर सुनवाई सुनिश्चित करवाई। इतना ही नहीं, कंपनी की निदेशक सारंगा अग्रवाल की गिरफ्तारी भी नहीं होने दी गई, जिससे उन्हें राहत मिली।
एजेंसी के मुताबिक, इन "एहसानों" के बदले अनुभव अग्रवाल ने विपुल बंसल के माध्यम से संजीव हंस को एक करोड़ रुपये की रिश्वत दी। यह रकम सीधे तौर पर नहीं दी गई, बल्कि शादाब खान और पुष्पराज बजाज के जरिए किस्तों में पहुंचाई गई। सीबीआई को इस लेन-देन के ठोस सबूत मिलने का दावा किया गया है।
इस मामले में दर्ज एफआईआर से नौकरशाही और कारोबारी जगत में हड़कंप मच गया है। एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का नाम सामने आने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। सीबीआई अब सभी आरोपियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है और आने वाले दिनों में पूछताछ तथा संभावित गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो सकती है।
सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि यह मामला भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है, जिसमें सरकारी पद का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया गया। जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है, ताकि मामले में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा सके।
फिलहाल, सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।






