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गया मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल जारी, दूसरे दिन भी ठप रही इमरजेंसी सेवा; सैकड़ों मरीज लौटे

Bihar News: गया के मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण लगातार दूसरे दिन भी इमरजेंसी सेवा ठप रही। डॉक्टर हॉस्टल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं, जिससे 200 से अधिक मरीज प्रभावित हुए हैं।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jun 07, 2026, 1:05:09 PM

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Bihar News: गया एएनएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का असर लगातार दूसरे दिन भी देखने को मिला। अस्पताल की इमरजेंसी सेवा पूरी तरह बंद रही और मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लटका रहा। इसके चलते इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को बिना उपचार के लौटना पड़ा, जबकि गंभीर मरीजों को अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ा।


अस्पताल परिसर में जूनियर डॉक्टर इमरजेंसी रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास बैनर लगाकर धरने पर बैठे हैं। आंदोलनरत डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक इमरजेंसी सेवा बहाल नहीं की जाएगी। डॉक्टरों का कहना है कि वे किसी भी अधिकारी के आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं और इस बार आंदोलन को निर्णायक रूप देने का फैसला किया गया है।


इमरजेंसी सेवा बंद होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों या अन्य सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए भेजा गया। अस्पताल में पहले से भर्ती कुछ मरीजों ने भी वैकल्पिक व्यवस्था तलाशते हुए अस्पताल छोड़ना शुरू कर दिया है। रविवार होने के कारण प्रशासन की ओर से सेवा बहाल कराने के लिए कोई विशेष पहल भी नजर नहीं आई, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई।


अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल ने बताया कि शनिवार देर रात तक जूनियर डॉक्टरों को समझाने और आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की गई, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन जल्द ही वैकल्पिक उपायों के जरिए इमरजेंसी सेवाएं दोबारा शुरू कराने का प्रयास करेगा, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।


आंदोलन कर रहे जूनियर डॉक्टरों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में उनके लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा अस्पताल और कॉलेज परिसर तक जाने वाली सड़कें बेहद जर्जर हैं और नालियों का गंदा पानी अक्सर सड़कों पर बहता रहता है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में न केवल उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है, बल्कि मरीजों के इलाज में भी कठिनाइयां आती हैं।


जूनियर डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि हर आंदोलन के बाद प्रशासन केवल आश्वासन देता है, लेकिन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। उनका कहना है कि हॉस्टल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी वजह से इस बार आंदोलन को आर-पार की लड़ाई का रूप दिया गया है।


अस्पताल की इमरजेंसी सेवा लगातार दूसरे दिन बंद रहने से क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हो रही है जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत है। मरीजों और उनके परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन और डॉक्टरों के बीच जल्द सहमति बनेगी तथा इमरजेंसी सेवाएं बहाल होंगी, ताकि गंभीर मरीजों को राहत मिल सके।