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Bihar universities : बिहार के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पारदर्शिता अनिवार्य, वेबसाइट पर देनी होगी शिक्षक से लेकर फीस तक की पूरी जानकारी

Bihar universities : बिहार के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अब शिक्षक, कोर्स फीस, नामांकन प्रक्रिया और एकेडमिक कैलेंडर जैसी सभी जानकारी अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी अनिवार्य होगी।

Bihar universities : बिहार के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पारदर्शिता अनिवार्य, वेबसाइट पर देनी होगी शिक्षक से लेकर फीस तक की पूरी जानकारी
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Bihar universities : बिहार के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों एवं उनसे संबद्ध कॉलेजों के लिए अब पारदर्शिता को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि विश्वविद्यालय और कॉलेज अपनी वेबसाइट पर शिक्षक, पाठ्यक्रम, कोर्स फीस, नामांकन प्रक्रिया से लेकर एकेडमिक और परीक्षा कैलेंडर तक की पूरी जानकारी सार्वजनिक करेंगे। यह निर्देश विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की गाइडलाइन के तहत जारी किया गया है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में नामांकन लेने वाले छात्र-छात्राओं को किसी भी तरह की भ्रामक या गलत जानकारी से बचाना है।


उच्च शिक्षा विभाग ने कहा है कि यूजीसी के निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन करना सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर संबंधित विश्वविद्यालय या कॉलेज के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसमें आर्थिक दंड लगाने के साथ-साथ संस्थान का संबंधन (अफिलिएशन) रद्द किए जाने तक का प्रावधान है। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल छात्रों को सही जानकारी मिलेगी, बल्कि कोर्स भी समय पर पूरे हो सकेंगे और संस्थान तय फीस से अधिक राशि वसूल नहीं कर पाएंगे।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत यूजीसी ने पहले ही सभी राज्यों को यह सुनिश्चित करने को कहा था कि उच्च शिक्षण संस्थान अपनी आवश्यक जानकारी सार्वजनिक करें। इसी कड़ी में अब बिहार में इस दिशा में ठोस कदम उठाया गया है। निर्देश के अनुसार विश्वविद्यालय और कॉलेजों को अपने अधिनियम, परिनियम और विनियम की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध करानी होगी। इसके साथ ही संस्थान का वार्षिक बजट, लेखा विवरण और विश्वविद्यालय अनुदान से संबंधित सभी तथ्यों को भी समय पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।


वेबसाइट पर विश्वविद्यालय से जुड़े सभी निकायों के सदस्यों का विवरण, उनकी कार्यावली और निर्णय प्रक्रिया की जानकारी देना भी बाध्यकारी होगा। इसके अलावा कुलपति, रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक सहित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची, संकायवार शिक्षकों की जानकारी, उनकी योग्यता और पदनाम भी सार्वजनिक करने होंगे। इससे छात्रों और अभिभावकों को संस्थान की अकादमिक गुणवत्ता का सही आकलन करने में मदद मिलेगी।


सूचना का अधिकार (आरटीआई) से संबंधित नोटिस, घोषणाएं, आरक्षण रोस्टर, आवेदन प्रक्रिया, रोजगार और प्लेसमेंट की संभावनाओं से जुड़ी जानकारी भी वेबसाइट पर उपलब्ध करानी होगी। उच्च शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि वेबसाइट पर दी जाने वाली सभी सूचनाएं त्रुटिरहित हों और भाषा सरल हो, ताकि आम लोगों को जानकारी हासिल करने में किसी तरह की परेशानी न हो।


इसके अलावा संस्थानों की शोध गतिविधियों, कंसल्टेंसी, अन्य संस्थानों के साथ किए गए समझौते (एमओयू), इंक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप को लेकर की जा रही पहल से जुड़ी जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी। एनसीसी, एनएसएस, खेलकूद, छात्रावास, प्लेसमेंट सेल, शिकायत निवारण तंत्र, एंटी रैगिंग कमेटी, समानता का अधिकार और दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं का विवरण भी वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। संस्थान के पूर्ववर्ती छात्र संघ (एलुमनाई) और उनके कार्यक्रमों की जानकारी भी देनी होगी।


उच्च शिक्षण संस्थानों को अपनी विकास योजना, मान्यता की स्थिति, एक्रिडिएशन और रैंकिंग का विवरण तथा वार्षिक रिपोर्ट भी सार्वजनिक करनी होगी। इसके साथ ही नामांकन के लिए विवरणिका (प्रोस्पेक्टस), नामांकन प्रक्रिया, कोर्सवार फीस संरचना और रिफंड से जुड़े प्रावधानों की जानकारी स्पष्ट रूप से वेबसाइट पर देनी होगी। उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि इन निर्देशों के लागू होने से बिहार के उच्च शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता बढ़ेगी, छात्रों का विश्वास मजबूत होगा और शिक्षा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाया जा सकेगा।

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Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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