Bihar school : बिहार में स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में अब दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ से होगी। यह फैसला नीतीश कुमार सरकार ने बुधवार को जारी किए गए आदेश के माध्यम से लिया है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के निर्देश के बाद राष्ट्रगीत को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने सभी अपर मुख्य सचिव, स्थानिक आयुक्त, प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी और सभी पुलिस अधीक्षकों को इस संबंध में आदेश भेजा है।
केंद्र सरकार ने 28 जनवरी 2026 को राष्ट्रगीत के गायन और उसके सम्मान को लेकर एक अहम आदेश जारी किया था। इसके तहत देशभर के स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में राष्ट्रगीत का गायन अनिवार्य करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। सरकार का मानना है कि यह कदम राष्ट्रीय एकता और नागरिक कर्तव्य को मजबूत करने के लिए अहम है।
निर्देशों के अनुसार, सभी शैक्षणिक संस्थानों में प्रार्थना सभा के दौरान सप्ताह में कम से कम एक दिन राष्ट्रगीत का गायन किया जाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, राष्ट्रीय पर्व, सरकारी कार्यक्रम और विशेष आयोजनों में भी राष्ट्रगीत को शामिल करना आवश्यक होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रगीत के दौरान सभी उपस्थित लोगों को सम्मानपूर्वक खड़ा रहना होगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही या असम्मान को गंभीरता से लिया जाएगा।
हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार की इस गाइडलाइन के खिलाफ दायर याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया। याचिका में कहा गया था कि सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ गाने के आदेश से लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। न्यायालय ने इसे समय से पहले (प्रीमैच्योर) दलील करार दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि ये दिशानिर्देश केवल सलाह के रूप में हैं और इनका पालन करना अनिवार्य नहीं है।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि दिशानिर्देश किसी भी व्यक्ति या संस्था को राष्ट्रगीत गाने या बजाने के लिए मजबूर नहीं करता। याचिका केवल संभावित डर और मनगढ़ंत आशंकाओं पर आधारित थी। न्यायालय ने यह संकेत दिया कि ऐसे मुद्दों पर तभी विचार किया जाएगा जब इनका पालन न करने पर कोई दंडात्मक कार्रवाई हो या इनका पालन अनिवार्य किया जाए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने दलील दी कि यह दिशानिर्देश अप्रत्यक्ष रूप से लोगों पर दबाव डाल सकता है और उनकी व्यक्तिगत पसंद और अंतरात्मा की स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है। उन्होंने कहा कि लोग अपनी मर्जी से राष्ट्रगीत गाने या न गाने का अधिकार खो सकते हैं।
न्यायालय ने इस दलील को अस्वीकृत करते हुए कहा कि जब तक कोई ज़बरदस्ती का तंत्र मौजूद न हो, तब तक यह अधिकारों का वास्तविक उल्लंघन नहीं है। पीठ ने जोर देकर कहा कि दिशानिर्देश में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख है कि पालन न करने पर कोई सजा नहीं है और यह सिर्फ एक सलाह है।
राज्य सरकार के अनुसार, यह निर्णय छात्रों में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने, एकता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देने के लिए लिया गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी स्कूलों में प्रार्थना सभा और सप्ताह में कम से कम एक दिन राष्ट्रगीत का गायन नियमित रूप से हो।
इसके साथ ही सरकार ने यह भी कहा कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में राष्ट्रगीत के दौरान सम्मान दिखाना सभी के लिए जरूरी है। ऐसा न करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की संभावना की जानकारी अधिकारियों को दी गई है।
इस तरह, बिहार में शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के माध्यम से दिन की शुरुआत होने जा रही है, जिससे छात्रों और नागरिकों में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को प्रोत्साहन मिलेगा।






