Bihar Police : बिहार पुलिस महकमे के कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने यह निर्णय लिया है कि अब सिपाही से लेकर पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर) स्तर के अधिकारियों के 10 दिन या उससे अधिक समय के दैनिक विराम भत्ते (Daily Allowance) की स्वीकृति पुलिस मुख्यालय के चक्कर काटे बिना की जा सकेगी। इस महत्वपूर्ण बदलाव का आदेश एडीजी (बजट/अपील/कल्याण) डॉ. कमल किशोर सिंह ने जारी किया है।
इस नए आदेश के तहत अब राज्य के सभी पुलिस विभागीय इकाइयों, रेल पुलिस और बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (Bihar Special Armed Police) में यह सुविधा लागू होगी। इसके अनुसार, आईजी (पुलिस महानिरीक्षक) और डीआईजी (उप-महानिरीक्षक) को यह अधिकार प्राप्त होगा कि वे अपने अधीनस्थ सिपाही, हेड कांस्टेबल, उप-निरीक्षक और पुलिस निरीक्षक तक के दैनिक विराम भत्ते को सीधे स्वीकृत कर सकें।
पूर्व व्यवस्था में, 10 दिन या उससे अधिक समय के दैनिक विराम भत्ते की स्वीकृति के लिए कर्मचारियों को पुलिस मुख्यालय के विभिन्न विभागों से अनुमति लेनी पड़ती थी। यह प्रक्रिया अक्सर समय लेने वाली और जटिल होती थी। कई बार कर्मचारियों को भत्ते के भुगतान में देरी होती थी, जिससे छुट्टी योजनाओं और ड्यूटी पर प्रभाव पड़ता था।
अब इस बदलाव से, अधिकारियों और कर्मचारियों दोनों के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया सरल और तेज होगी। पुलिस कर्मचारियों को भत्ते समय पर मिलेंगे और मुख्यालय से बार-बार अनुमोदन लेने की आवश्यकता समाप्त होगी। यह कदम विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज़ के इलाकों में तैनात कर्मचारियों के लिए फायदेमंद साबित होगा, जहां भत्ते की स्वीकृति में अक्सर देरी होती थी।
एडीजी (बजट/अपील/कल्याण) डॉ. कमल किशोर सिंह ने बताया कि यह आदेश पुलिस महकमे के कर्मचारियों की सुविधा और अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और कर्मचारियों की संतुष्टि बढ़ेगी।
पुलिस मुख्यालय और वित्त विभाग ने इस आदेश पर सहमति व्यक्त की है। इससे पहले स्पष्ट निर्देश न होने के कारण कई बार आईजी और डीआईजी स्तर के अधिकारी भी भ्रमित हो जाते थे कि किस स्थिति में स्वीकृति देना उचित है। अब यह अधिकार स्पष्ट रूप से IG और DIG को प्रदान किया गया है, जिससे किसी भी तरह की अनिश्चितता या देरी नहीं रहेगी।
विशेष रूप से, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के मंडलीय उप-महानिरीक्षक को भी यह अधिकार दिया गया है। यह सुनिश्चित करेगा कि सभी इकाइयों में समान और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्वीकृति प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के दुरुपयोग की स्थिति में संबंधित अधिकारी की जवाबदेही होगी।
इस कदम से न केवल कर्मचारियों की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि पुलिस प्रशासन की दक्षता और पारदर्शिता भी मजबूत होगी। अब सिपाही और पुलिस निरीक्षक अपने दैनिक विराम भत्ते की स्वीकृति के लिए मुख्यालय के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी और समय पर भत्ते प्राप्त कर सकेंगे।
यह बदलाव बिहार पुलिस महकमे में कर्मचारियों के लिए एक स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों को अब उनके अधिकारों का प्रयोग करते हुए भत्ते स्वीकृत करने में सुविधा होगी, जबकि कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी, लंबी यात्रा या छुट्टी के दौरान बिना विलंब के भत्ते प्राप्त होंगे।
अंततः, यह कदम बिहार पुलिस के कर्मचारियों के हित में एक बड़ा सुधार है। इससे न केवल भत्ते की स्वीकृति प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि पुलिस महकमे में प्रशासनिक कार्यकुशलता और कर्मचारी-केंद्रित नीति को भी मजबूती मिलेगी।






