Bihar Politics : बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद अब सबकी नजरें आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं। इस बीच मंत्री विजय चौधरी के बयान ने सियासी चर्चाओं को और भी हवा दे दी है। उन्होंने साफ कहा कि मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण तय कार्यक्रम के अनुसार होगा और उसके बाद ही सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
विजय चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए निर्धारित समय पर जाएंगे और परसों शपथ ग्रहण करेंगे। इसके बाद वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। इस्तीफे के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सभी दलों की बैठक होगी, जिसमें नए नेता का चयन किया जाएगा और उसी आधार पर नई सरकार का गठन होगा।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। जब विजय चौधरी से इस बारे में सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा, “जरा स्थिर होकर पूछिए कि अगला सीएम कौन होगा। जिन-जिन को आप लोग रेस में लगा देते हैं, वही होंगे।” उनके इस बयान को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, पिछले कुछ महीनों से मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में एक नाम लगातार प्रमुखता से सामने आ रहा है—सम्राट चौधरी। उन्हें मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। खास बात यह है कि खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अपनी यात्रा के दौरान कई बार ऐसे संकेत दिए हैं, जिनसे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वे सम्राट चौधरी को आगे बढ़ा सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय चौधरी भले ही सीधे तौर पर किसी नाम का ऐलान नहीं कर रहे हों, लेकिन उनके बयान में छिपे संकेत काफी कुछ साफ कर रहे हैं। उनका यह कहना कि “जिन्हें आप रेस में मान रहे हैं, वही होंगे”, कहीं न कहीं सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लगाने जैसा माना जा रहा है।
हालांकि, अंतिम फैसला NDA की बैठक में ही होगा, जहां सभी सहयोगी दल मिलकर सर्वसम्मति से नेता का चयन करेंगे। इसमें भाजपा, जदयू समेत अन्य दलों की भूमिका अहम होगी। ऐसे में यह भी संभव है कि अंतिम समय में कोई और नाम भी सामने आ जाए, लेकिन फिलहाल जो संकेत मिल रहे हैं, वे सम्राट चौधरी के पक्ष में जाते दिख रहे हैं।
बिहार की राजनीति में यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे राज्य की सत्ता और राजनीतिक समीकरणों पर दूरगामी असर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण, इस्तीफे और उसके बाद होने वाली NDA बैठक पर टिकी हैं, जहां बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।






