Bihar News: बिहार विधानसभा में आज कैग की रिपोर्ट पेश किया गया. वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने पिछले वित्तीय वर्ष का नियंत्रक एवं महालेखाकार का परीक्षण रिपोर्ट पेश किया है. रिपोर्ट से बिहार सरकार की वित्तीय व्यवस्था की पोल खुल गई है. हालात ऐसे हैं कि सरकार राजस्व की वसूली नहीं कर पा रही. सरकार का निगम खुद को नुकसान में रखते हुए ठेकेदारों को लाभ पहुंचा रहा. परिवहन विभाग में भी बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है.
फिटनेस प्रमाण पत्र में किया गया बड़ा खेल
कैग की रिपोर्ट में परिवहन विभाग द्वारा संचालित गाड़ियों के स्वचालित जांच केंद्र (एटीएस) को लेकर बड़ा खुलासा किया गया है. परिवहन वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र में भी बड़ा खेल किया गया। जिससे सरकार को 2 करोड़ 27 लाख की राजस्व हानि हुई है। CAG की रिपोर्ट में कहा गया है की विभागीय अधिकारियों ने स्वचालित परीक्षण केंद्र से वाहनों की फिटनेस जांच के लिए मानक संचालन प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया. स्वचालित प्रणाली का उपयोग के बिना और सभी निर्धारित मापदंडों के अनुसार परीक्षण किए बिना ही सर्टिफिकेट दिए गए। 47223 वाहनों में से 42672, 90 फ़ीसदी से अधिक ऐसे वाहनों को प्रावधानों का उल्लंघन कर फिटनेस प्रमाण पत्र दिया गया. फिटनेस का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए अपॉइंटमेंट आवेदन ऑनलाइन नहीं की गई थी। जो विभागीय नियमों के अनुचित मानचित्रण का भी संकेत है। इसके अलावा 66345 परीक्षण जांच किए गए वाहनों में से 35921 वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र कालातीत हो गया था । जिससे सड़क और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हुआ।
बिहार विधानसभा में आज कैग रिपोर्ट पेश की गई। इसके बाद कई बड़े खुलासे हुए हैं। इसमें पाया गया है कि बिहार सरकार खुद के लिए राजस्व तक नहीं वसूल पा रही है। सरकार की ओर से जो रिपोर्ट आज पेश की गई, उसमें साफ तौर पर कहा गया है कि 31 मार्च 2023 तक 4844 करोड़ 46 लाख रुपये राजस्व बकाया थे, जिनमें से 1430 करोड़ 32 लाख रुपये 5 वर्षों से अधिक समय से लंबित थे।
बिक्री व्यापार कर पर 2371 करोड़ 90 लाख रुपये बकाया हैं, जिनमें 1289 करोड़ 39 लाख रुपये 5 साल से अधिक समय से लंबित हैं। माल एवं यात्रियों पर कर के रूप में 248 करोड़ 58 लाख रुपये राजस्व बकाया हैं। विद्युत पर कर एवं शुल्क के रूप में 20 लाख रुपये बकाया हैं। वस्तु एवं सेवाओं पर 3 करोड़ 25 लाख रुपये बकाया हैं।
राज्य उत्पाद पर 54 करोड़ 30 लाख रुपये तथा खनन एवं धातुकर्म उद्योग पर 1505 करोड़ 16 लाख रुपये बकाया हैं। खान एवं भूतत्व विभाग ने 5 वर्षों से अधिक समय से लंबित बकाया का विवरण नहीं दिया है। राशि वसूली के लिए भू-राजस्व के रूप में नीलामवाद दायर किया गया है।





