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Bihar News: "न कोई चापाकल, न एक भी सरकारी नल" बिहार के इस गाँव में पेयजल की समस्या से लोग परेशान; प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप

Bihar News: पश्चिम चंपारण के रामनगर प्रखंड के अवरहिया गांव में 500 लोग एक हैंडपंप पर निर्भर, महिलाएं रोज 2 किमी दूर जाकर लाती हैं पानी। प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप..

Bihar News
प्रतीकात्मक
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Deepak KumarDeepak Kumar|
|AMP
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Bihar News: पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर प्रखंड में स्थित अवरहिया गांव की स्थिति बेहद दयनीय है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटा यह गांव करीब 80 घरों और 500 लोगों की आबादी वाला है, लेकिन यहां पानी की बुनियादी सुविधा का अभाव है। एक भी चापाकल या सरकारी नल नहीं होने से ग्रामीणों को रोज 2 किलोमीटर दूर नदी किनारे एकमात्र हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। यह समस्या राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से भी बदतर लगती है, जहां पानी के लिए मीलों पैदल चलना आम है।


गांव के पुरुष साइकिल पर गैलन बांधकर पानी लाते हैं और इन्हें रोज 10 चक्कर लगाने पड़ते हैं। महिलाओं की हालत और खराब है, क्योंकि पुरुष मजदूरी पर बाहर जाते हैं तो घर की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ जाती है। सूरज निकलने से पहले वे नदी किनारे पहुंचती हैं, नहाने-धोने के बाद भारी बर्तन सिर पर उठाकर लौटती हैं। यह सिलसिला दिन भर चलता रहता है, जिससे स्वास्थ्य और समय दोनों प्रभावित होते हैं।


ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से चापाकल या नल-जल योजना की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन का कहना है कि गांव विस्थापित परिवारों का है और टाइगर रिजर्व से सटा होने से वन विभाग की अनुमति जरूरी है। पुनर्वास का प्रस्ताव ग्रामीणों ने ठुकरा दिया। लेकिन सवाल है कि जल जीवन मिशन के दावों के बावजूद यह गांव पानी के लिए क्यों तरस रहा है?


यह स्थिति न केवल शारीरिक परेशानी की है, बल्कि महिलाओं और बच्चों की शिक्षा पर भी असर डाल रही है। प्रशासन को इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए, ताकि अवरहिया जैसे गांवों में बुनियादी सुविधाएं पहुंच सकें। उम्मीद है कि जल्द ठोस कदम उठाए जाएंगे और ग्रामीणों को इस मजबूरी से मुक्ति मिलेगी।

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Deepak Kumar

रिपोर्टर / लेखक

Deepak Kumar

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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