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Bihar Governor : बिहार में पिछले 10 वर्षों में सात राज्यपाल बदले, औसतन डेढ़ से दो साल का रहा कार्यकाल; जानिए आजादी के बाद अबतक कितने गवर्नर

बिहार में पिछले 10 वर्षों में सात राज्यपाल बदले गए हैं। हाल के वर्षों में राज्यपाल का औसतन कार्यकाल डेढ़ से दो साल रहा है। जानिए बिहार के राज्यपालों का पूरा इतिहास और कार्यकाल।

Bihar Governor : बिहार में पिछले 10 वर्षों में सात राज्यपाल बदले, औसतन डेढ़ से दो साल का रहा कार्यकाल; जानिए आजादी के बाद अबतक कितने गवर्नर
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Bihar Governor : बिहार में पिछले एक दशक के दौरान राज्यपाल पद पर लगातार बदलाव देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 वर्षों में राज्य में सात राज्यपाल बदले गए हैं। हाल के वर्षों में राज्यपालों का कार्यकाल औसतन डेढ़ से दो साल के बीच ही रहा है। यह स्थिति इस बात को भी दर्शाती है कि बिहार में राज्यपाल का पद लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के पास नहीं रहा।


वर्तमान में बिहार के राज्यपाल Arif Mohammad Khan हैं। उनसे पहले Rajendra Vishwanath Arlekar 17 फरवरी 2023 से 1 जनवरी 2025 तक इस पद पर रहे। उनके कार्यकाल के बाद राज्यपाल पद पर बदलाव हुआ और नई नियुक्ति की गई।


राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से पहले Fagu Chauhan ने लगभग साढ़े तीन साल तक बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। उनका कार्यकाल 29 जुलाई 2019 से 16 फरवरी 2023 तक रहा। उनसे पहले Lalji Tandon 23 अगस्त 2018 से 28 जुलाई 2019 तक राज्यपाल रहे। इसी क्रम में Satyapal Malik 4 अक्तूबर 2017 से 22 अगस्त 2018 तक बिहार के राज्यपाल रहे थे।


साल 2017 में कुछ समय के लिए Keshari Nath Tripathi ने भी राज्यपाल के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। इससे पहले Ram Nath Kovind 16 अगस्त 2015 से 21 जून 2017 तक बिहार के राज्यपाल रहे। बाद में वे देश के राष्ट्रपति भी बने। इन सभी नियुक्तियों से यह साफ होता है कि पिछले दशक में राज्यपाल पद पर लगातार परिवर्तन हुआ है।


अगर बिहार के राज्यपालों के इतिहास पर नजर डालें तो राज्य गठन के बाद से अब तक कई प्रमुख व्यक्तित्व इस पद पर रह चुके हैं। स्वतंत्रता के बाद बिहार के पहले राज्यपाल जयरामदास दौलतराम थे, जिन्होंने 15 अगस्त 1947 से 11 जनवरी 1948 तक यह पद संभाला। इसके बाद माधव श्रीहरि अणे 12 जनवरी 1948 से 14 जून 1952 तक राज्यपाल रहे।


इसके बाद कई प्रतिष्ठित नेताओं और विद्वानों ने बिहार के राज्यपाल के रूप में अपनी भूमिका निभाई। इनमें आर.आर. दिवाकर, डॉ. जाकिर हुसैन, मदभूषि अनंतशयनम अय्यंगार और नित्यानंद कानूनगो जैसे नाम प्रमुख हैं। डॉ. जाकिर हुसैन बाद में भारत के राष्ट्रपति भी बने, जिससे यह पद और भी महत्वपूर्ण माना जाता है।


1970 और 1980 के दशक में भी बिहार में कई राज्यपाल बदले। इस दौरान देवकांत बरूआ, रामचंद्र धोडिंबा भंडारे, जगन्नाथ कौशल, अखलाक-उर-रहमान किदवई और पेंडेकंती वेंकटसुब्बैया जैसे नेताओं ने राज्यपाल के रूप में कार्य किया।


1990 के दशक में भी राज्यपाल पद पर कई बार बदलाव हुआ। इस अवधि में मुहम्मद शफी कुरैशी, सुंदर सिंह भंडारी और विनोद चंद्र पांडे जैसे नेता राज्यपाल रहे। इसके बाद 2000 के दशक में बूटा सिंह, गोपालकृष्ण गांधी, आर.एस. गवई और आर.एल. भाटिया जैसे नाम इस पद से जुड़े।


हाल के वर्षों में देबानंद कुंवर, ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल, केशरी नाथ त्रिपाठी, रामनाथ कोविंद, सत्यपाल मलिक, लालजी टंडन, फागू चौहान और राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर जैसे नेताओं ने बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्य किया।


विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यपाल संवैधानिक पद होता है और इसकी भूमिका राज्य और केंद्र के बीच संवैधानिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण होती है। हालांकि हाल के वर्षों में बिहार में राज्यपालों का औसत कार्यकाल अपेक्षाकृत कम रहा है, जिससे यह पद लगातार चर्चा में बना रहा है।

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Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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