Bihar News : बिहार की राजनीति में एक बार फिर बिजली दरों को लेकर घमासान शुरू हो गया है। नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि चुनाव के दौरान किए गए वादों से मुकरते हुए सरकार अब जनता पर महंगी बिजली का बोझ डाल रही है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि- नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार और Bharatiya Janata Party ने चुनाव के वक्त 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का वादा किया था, लेकिन महज चार महीने के भीतर ही सरकार अपने “असल रंग” में लौट आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब नई दरों के तहत उपभोक्ताओं से अलग-अलग समय के हिसाब से अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, शाम 11 बजे तक के 6 घंटे में बिजली की दर 8.10 रुपये प्रति यूनिट, रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक 7.10 रुपये प्रति यूनिट और बाकी 8 घंटे के लिए 5.94 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई है। उन्होंने इसे “चीटर मीटर” व्यवस्था बताते हुए कहा कि यह आम जनता की जेब पर सीधा हमला है।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान जनता को “तत्काल लाभ” दिखाकर वोट हासिल किए गए, लेकिन अब उन्हीं लोगों से इसकी कीमत वसूली जा रही है। उन्होंने कहा कि “10 हजार रुपये के लालच में वोट देने वालों को अब आने वाले समय में और भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।”
इसके साथ ही उन्होंने राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। तेजस्वी ने दावा किया कि सरकार का खजाना लगभग खाली हो चुका है और जो संसाधन बचे हैं, वे भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के अंतिम 35 दिनों में भारी मात्रा में सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
तेजस्वी यादव ने Election Commission of India पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान अनियमितताएं हुईं, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि “मशीनी तंत्र” के जरिए चुनाव को प्रभावित किया गया और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार किया गया।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले पांच वर्षों में सरकार जनता से “भरपूर वसूली” करेगी। उन्होंने राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और लूट की आशंका जताते हुए कहा कि बिहार में स्थिति और खराब हो सकती है।
हालांकि, राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिजली दरों का मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है।
बिहार में पहले से ही महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर जनता में असंतोष की चर्चा होती रही है। ऐसे में बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
अब देखने वाली बात होगी कि सरकार इन आरोपों का क्या जवाब देती है और क्या बिजली दरों को लेकर कोई राहत दी जाती है या नहीं। फिलहाल, इस मुद्दे ने बिहार की सियासत को गर्मा दिया है और आने वाले समय में यह बहस और तेज होने के आसार हैं।






