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अफसरों की ‘री-एंट्री’...करप्शन पर सरकार की नीयत ठीक नहीं ! 80 Cr के DSP चर्चा में, जेल अधीक्षक 'विधु-रूपक' जैसे अधिकारियों की लंबी फेहरिस्त जिन्होंने तुरंत ले ली फील्ड पोस्टिंग

गौतम कुमार की करीब 80 करोड़ की संपत्ति के खुलासे के बाद भ्रष्टाचार पर सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं।जेल अधीक्षक विधु कुमार और एआईजी रूपक कुमार जैसे अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगने के बावजूद बाद में उन्हें फील्ड पोस्टिंग मिल चुकी

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Viveka Nand
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Bihar News: बिहार में इन दिनों भ्रष्ट डीएसपी गौतम कुमार के अकूत संपत्ति की खूब चर्चा हो रही है. डीएसपी ने न सिर्फ पत्नी बल्कि गर्ल फ्रेंड से लेकर नौकरानी को भी धनकुबेर बना दिया. जांच एजेंसी के दावे से अधिकारियों की कमाई की पोल खुल रही है. आर्थिक अपराध इकाई ने जैसे ही डीएसपी की अकूत संपत्ति सार्वजनिक किया, सरकार हिल गई.पुलिस मुख्यालय ने आनन-फानन में आरोपी डीएसपी को मुख्यालय अटैच कर दिया है. हालांकि सरकार की मंशा भ्रष्टाचार को लेकर साफ नहींदिखती. जांच के नाम पर मामले को लटकाये रखा जाता है. एक ही आरोप में बिना क्लीन चिट मिले ही चहेते धनकुबेर अफसरों पर कृपा बरसाई जाती है. वैसे धनकुबेर अफसरों को कुछ दिन बाद ही फील्ड में चुपके से पोस्टिंग दे दी जाती है. दूसरी तरफ जिनकी सरकार में पहुंच नहीं होती, वे इस तरह के आरोपों में सालों-साल बैठे रहते हैं, फिर सेवानिवृत हो जाते हैं.

चहेते अफसरों पर बरसाई जा रही कृपा 

किशनगंज के तत्कालीन डीएसपी गौतम कुमार अकेले ऐसे अधिकारी नहीं, जिनके ठिकानों पर रेड के दौरान अकूत संपत्ति मिलने का दावा किया गया हो. कई ऐसे अधिकारी हैं, जिनके ठिकानों पर छापेमारी हुई, जांच एजेंसियों को काफी कुछ मिला. इसके बाद सरकार अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए आरोपी अधिकारी को सस्पेंड करती है, जैसे ही लोग भूले, फिर से से उक्त अधिकारी को फील्ड में पोस्टिंग मिल जाती है. एक नहीं अनेकों ऐसे उदाहरण हैं. सुशासन राज में हालत तो ऐसी हो गई है कि साल भर में ही भ्रष्टाचार के आरोपी अफसरों को फिर से उसी पोस्ट (जिस पर रहते कमाई के आरोप में छापेमारी हुई) पर पोस्टिंग दे दी जा रही. 

  जेल अधीक्षक विधु कुमार से लेकर जेल एआईजी रूपक के भ्रष्टाचार की चर्चा 

दरोगा से प्रमोट होकर डीएसपी बने गौतम कुमार पर आरोप है कि सेवा काल में 80 करोड़ की संपत्ति बनाई है. यह संपत्ति पत्नी-सास और महिला मित्र के नाम पर अर्जित की है. जांच एजेंसी के खुलासे से हड़कंप मच गया है. अब आर्थिक अपराध इकाई लगभग 80 करोड़ की संपत्ति अर्जित करने वाले डीएसपी से अब पूछताछ करेगी. 31 मार्च की छापेमारी के बाद से डीएसपी गौतम कुमार बिहार भर में चर्चा में हैं. आखिर इतनी संपत्ति कैसे बनाई? इसी तरह की चर्चा 2025 में भी हुई थी, जब आर्थिक अपराध इकाई ने ही बेउर जेल के अधीक्षक विधु कुमार के भ्रष्टाचार का खुलासा किया था. डीए केस दर्ज कर ईओयू ने जेल अधीक्षक विधु कुमार व अन्य के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. तब दावा किया गया था कि करोड़ों की अवैध संपत्ति व लेन-देन का पता चला है. साल भर होते-होते सरकार ने भ्रष्टाचार के उक्त आरोपी जेल अधीक्षक विधु कुमार पर जबरदस्त कृपा बरसाई है. ऐसी कृपा जिसे देख-सुनकर आर्थिक अपराध इकाई भी हतप्रभ है. विधु कुमार से पहले वर्ष 2022 में जेल के ही एक एआईजी रूपक कुमार की संपत्ति को लेकर बड़ा खुलासा हुआ था. तब विशेष निगरानी इकाई ने रूपक कुमार की पोल खोली थी. एसवीयू ने बेउर जेल के पूर्व अधीक्षक और तत्कालीन जेल एआईजी रूपक कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस सं- 5/2022 दर्ज किया था. डीए केस दर्ज करने के बाद रूपक कुमार के कई ठिकानों पर रेड हुआ था. तब जांच एजेंसी ने रूपक कुमार के आलीशान घर समेत अकूत संपत्ति मिलने के बारे में जानकारी साझा की थी.

रूपक कुमार को भी फील्ड पोस्टिंग...

तब के जेल एआईजी रूपक कुमार के आशियाना नगर फेज -2 स्थित घर और सचिवालय स्थित कार्यालय में एक साथ छापा मारा गया था. इस अधिकारी के कार्यालय से 5.80 लाख से अधिक नकदी और घर से 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य का सोना बरामद किये जाने का दावा विशेष निगरानी इकाई ने किया था. जांच एजेंसी ने दावा किया था कि रूपक कुमार ने भ्रष्टाचार से अकूत संपत्ति कमाई है. इस अफसर ने अवैध कमाई के बल पर पटना, रांची, देवघर, जमशेदपुर, नोएडा, सिलीगुड़ी समेत देश के कई शहरों में रियल एस्टेट में भारी निवेश किया है. सहायक आईजी रूपक कुमार का आशियाना नगर आवास और उसकी साजसज्जा देखकर अधिकारी हैरान रह गए थे. मकान के दीवारों की सजावट पर लाखों रुपए खर्च किये गये थे. महंगी पेंटिंग लगाई गई थी. इस मकान की कीमत करीब 2-3 करोड़ आंकी गई थी. सहायक कारा महानिरीक्षक रूपक कुमार पर विशेष निगरानी इकाई की लंबे समय से नजर थी. पुख्ता सबूत मिलने के बाद भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया. विशेष कोर्ट से सर्च वारंट मिलने के बाद 10 अप्रैल को मकान और सचिवालय कार्यालय में एक साथ धावा बाेला गया था .  विशेष निगरानी इकाई के अनुसार रूपक कुमार के पास देवघर में जमीन का एक बड़ा प्लाट है. जमशेदपुर के पाश इलाके में आलीशान तीन-बीएचके का फ्लैट और जमीन है. रांची में भी रूपक कुमार का फ्लैट और जमीन है. एक फ्लैट सिलीगुड़ी में भी है. नोएडा व्यावसायिक दुकानें और प्लाट है. पटना में बिहटा, लोदीपुर में इनके फ्लैट्स हैं. बेंगलुरू में जमीन खरीदने से संबंधित कागजाद मिलने का दावा किया गया था. 

करप्शन केस में क्या हुआ..कुछ नहीं, केस करने की भी तैयारी 

करप्शन केस में क्या हुआ....जवाब है कुछ नहीं. रूपक कुमार को फिर से फील्ड यानि जेल अधीक्षक के तौर पर पोस्टिंग देकर उपकृत कर दिया गया. गृह विभाग की तरफ से 12 जून 2025 को कारा सेवा के अधिकारियों की जो सिविल लिस्ट जारी की गई है, उसमें रूपक कुमार नंबर-1 पर हैं. लिस्ट में भ्रष्टाचार के आरोपी रूपक कुमार को हाजीपुर मंडल कारा का अधीक्षक बताया जा रहा है. ये 31 दिसंबर 2026 को सेवानिवृत होंगे. इधर विशेष निगरानी इकाई ने इनके खिलाफ अकूत संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज किया था, वो अभी अनुसंधान में ही है. खुद निगरानी विभाग ने इस संबंध में जानकारी दिया है. इधऱ, विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली है कि रूपक कुमार को क्लीन चिट देने की तैयारी है. सरकार के स्तर से इन पर कृपा बरसाई जा रही है. संभव है कि, बिहार के लोगों तक यह खबर पहुंच जाय कि सरकार ने इनके खिलाफ दर्ज डीए केस को वापस ले लिया. सवाल यहां भी है, अगर जांच एजेंसी ने बिना समझे,पुख्ता प्रमाण के किसी अधिकारी के खिलाफ डीए केस दर्ज करे और बाद में मामला फुस्स हो जाए, तब ऐसी एजेंसी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

साल भर में ही विधु कुमार को बेगूसराय का जेल अधीक्षक बना दिया 


आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने पटना के बेउर आदर्श केंद्रीय कारा के तत्कालीन अधीक्षक विधु कुमार के खिलाफ 3 जनवरी 2025 को डीए केस सं- 1/25 दर्ज किया था. इसके बाद जेल अधीक्षक के पटना से लेकर मोतिहारी तक कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. तब यह मामला काफी चर्चा में रहा. कई दिनों तक यह खबर सुर्खियों बटोरी. सरकार की भद्द मिटने के बाद गृह विभाग ने 22 जनवरी 2025 को आरोपी जेल अधीक्षक विधु कुमार को सस्पेंड किया था. कुछ महीनों तक सस्पेंड रखने के बाद सरकार ने चुपके से भ्रष्टाचार के बड़े आरोपी विधु कुमार को निलंबन मुक्त किया और आरोपों को दरकिनार कर फील्ड में पोस्टिंग दे दी. उक्त आरोपी अधिकारी को बेगूसराय का जेल अधीक्षक बनाया गया है. गृह विभाग के 10 फऱवरी 2026 की अधिसूचना के अनुसार, करप्शन केस के बड़े आरोपी को बेगूसराय का जेल अधीक्षक के पद पर पोस्टिंग दी गई है. इस तरह से फील्ड में जगह देकर सरकार ने करप्शन के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का खुद ही माखौल उड़ा दिया

विधु कुमार के खिलाफ ईओयू ने दर्ज किया था डीए केस  

ईओयू के केस आरोप लगाया गया था कि विधु कुमार ने अपने पद का दुरुपयोग कर अकूत अवैध संपत्ति अर्जित की जो वैध स्रोत से हुई आय से 146 प्रतिशत अधिक है। बेउर केंद्रीय कारा के तत्कालीन अधीक्षक व वर्तमान में बेगूसराय के अधीक्षक विधु कुमार पर आरोप है कि ये जेल में बंद कैदियों का शोषण और मानसिक उत्पीडऩ कर उनसे पैसों की उगाही करते थे। उनकी काली कमाई में परिवार के कई सदस्यों के साथ ही विश्वसनीय कक्षपाल प्रफुल्ल कुमार भी शामिल थे। ईओयू की छापेमारी के बाद गृह विभाग ने 22 जनवरी 2025 को आरोपी जेल अधीक्षक विधु कुमार को सस्पेंड कर दिया था. निलंबन अवधि में विधु कुमार का मुख्यालय केंद्रीय कारा, बक्सर निर्धारित किया गया था.

विधु कुमार पर आरोप थे कि इन्होंने अपनी अवैध कमाई से 54 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात एवं बर्तन खरीदे. चार लाख रुपये चांदी के बर्तन खरीदने में भी काली कमाई का इस्तेमाल किया था। इनके यहां छापामारी के दौरान जमीन खरीद की छह डीड भी बरामद की गई थी. विधु कुमार के ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई ने पटना के सरकारी आवास के साथ ही इनके बेउर स्थित कार्यालय कक्ष, सगुना स्थित घर, बिशनपुरा बिहटा स्थित घर, आरा गार्डन रेसीडेंसी स्थित किराये के फ्लैट के साथ ही कक्षपाल प्रफुल्ल कुमार के घर, मोतिहारी में एक करीबी के घर और इनके सीए के कार्यालय में ईओयू की टीमों ने एक साथ छापा मारा था। जिसमें यह जानकारी सामने आई कि विधु कुमार ने वैध आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित करते हुए पटना, मोतिहारी एवं अन्य स्थानों पर मां, पिता और पत्नी एवं अपने नाम पर कई अचल संपत्तियां खरीदी थी.

ईओयू ने मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से काले धन को सफेद बनाने के लगाए थे आरोप 

ये मनी लॉन्डरिंग कर यह अपने काले धन को सफेद भी बना रहे थे। इसके लिए उन्होंने मां और पत्नी के नाम पर कई शेल कंपनियां भी बनाई थी। मनी लॉन्डरिंग के इस काम में नजदीकी मित्र और इनके चार्टर्ड एकाउंटेंट की अहम भूमिका पाई गई। ईओयू की टीम ने बेउर जेल स्थिति इनके कार्यालय कक्ष से मां विंध्यवासनी ट्रेडिंग, छतौनी, मोतिहारी का बैंक स्टेटमेंट, उषा इंडस्ट्रीज बसवरिया, मोतिहारी का ब्लैंक बैंक एनवायस, विधु कुमार पर पूर्व में लगे आरोपों से संबंधित तीन आवेदन पत्र जिसमें विधु कुमार के अवैध धनार्जन का आरोप है।

मोतिहारी में भी जेल अधीक्षक रहे थे विधु कुमार 

मोतिहारी में विधु कुमार के करीबी मित्र के घर से टैक्स एनवायस के साथ 13 महंगी एसयूवी गाडिय़ां जबकि सीए के ठिकानों से बैंक खातों के स्टेटमेंट और शैलजा देवी एवं गोपाल शरण के नाम जमीन क्रय से जुड़ी पांच डीड की छाया प्रति बरामद की गई थी. मामला अभी जांच में है. इधर सरकार ने विधु कुमार को फील्ड में जगह (जेल अधीक्षक) के रूप में पोस्टिंग दे दी है.

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रिपोर्टर / लेखक

Viveka Nand

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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